दुबई से तेल अवीव (इजराइल) जा रही फ्लाईदुबई (Flydubai) की एक उड़ान के दौरान उस समय हड़कंप मच गया, जब विमान से अचानक एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी और ‘हाईजैक’ (अपहरण) का संकेत प्रसारित होने लगा। यह विमान दुबई से रवाना होकर इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट की ओर बढ़ रहा था, लेकिन उड़ान भरने के करीब डेढ़ घंटे बाद ही जॉर्डन और सऊदी अरब के ऊपर इसकी दिशा अचानक बदल दी गई।
विमान के ट्रांसपोंडर से पहले अंतरराष्ट्रीय जनरल इमरजेंसी कोड ‘7700’ और उसके तुरंत बाद अवैध हस्तक्षेप यानी हाईजैक का संकेत देने वाला कुख्यात कोड ‘7500’ प्रसारित किया गया। इस तरह के आपातकालीन संदेश मिलते ही विमानन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच तुरंत हड़कंप मच गया, क्योंकि कोड 7500 का मतलब सीधे तौर पर विमान पर जबरन कब्जे या किसी बड़ी सुरक्षा खतरे की आशंका से जोड़ा जाता है।
स्थिति की अत्यधिक सुकुमारी और गंभीरता को भांपते हुए, इजरायली वायुसेना ने तुरंत हरकत में आते हुए अपने लड़ाकू विमानों (फाइटर जेट्स) को आसमान में सतर्क कर दिया। साथ ही, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री ने इस अचानक पैदा हुए सुरक्षा संकट से निपटने तथा हालातों की समीक्षा के लिए फौरन एक उच्चस्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई।
सुरक्षा संकट और संभावित खतरे को देखते हुए विमान को तुरंत उसके निर्धारित मार्ग से डायवर्ट किया गया और सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया गया। विमान के जमीन पर सुरक्षित उतरने के बाद अधिकारियों और यात्रियों ने राहत की सांस ली, क्योंकि इस फ्लाइट में लगभग डेढ़ सौ से अधिक यात्री सवार थे।
शुरुआती जांच-पड़ताल और इजरायली सुरक्षा अधिकारियों की आधिकारिक बयानों के बाद यह स्पष्ट कर दिया गया कि विमान के अपहरण जैसी कोई घटना नहीं हुई थी और हाईजैक की आशंका पूरी तरह से बेबुनियाद साबित हुई। जांच में सामने आया कि कॉकपिट के भीतर दोनों पायलटों के बीच किसी बात को लेकर आपसी विवाद हो गया था, जिसकी वजह से गलती से या आपात स्थिति में हाईजैक का वह इमरजेंसी सिग्नल एक्टिवेट हो गया था।

