म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य में सैन्य जुंटा (सेना) द्वारा किए गए एक बेहद भीषण और अमानवीय हवाई हमले ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कम से कम 50 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। यह हमला क्याउक्ताव टाउनशिप के एक व्यस्त और घनी आबादी वाले स्थानीय बाजार और उसके पास स्थित पुल को निशाना बनाकर किया गया। स्थानीय राहत कार्यकर्ताओं, प्रत्यक्षदर्शियों और विद्रोही संगठन के अनुसार, यह एयरस्ट्राइक दिन के ऐसे समय में की गई जब बाजार में खरीदारों, दुकानदारों और आम नागरिकों की भारी चहल-पहल थी।
अचानक हुए इस हमले ने पलभर में बाजार को मलबे के ढेर में बदल दिया। इस खौफनाक घटना में 50 लोगों की मौके पर ही या अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई, जबकि 58 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम घायलों के इलाज में जुटी हुई है। हालांकि, कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिसके चलते राहत कर्मियों और अधिकारियों ने अंदेशा जताया है कि मरने वालों का यह आंकड़ा आने वाले समय में और भी बढ़ सकता है।
यह पूरा क्षेत्र और आसपास का हिस्सा वर्तमान में शक्तिशाली विद्रोही संगठन ‘अराकान आर्मी’ के नियंत्रण में है। विद्रोही गुट और स्थानीय निवासियों ने म्यांमार की सेना पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सेना युद्ध के मैदान में विद्रोही ताकतों के हाथों मिल रही हार से बौखला गई है। इसी झुंझलाहट में वह जानबूझकर रिहायशी इलाकों, बाजारों और आम नागरिकों को अपना निशाना बना रही है ताकि जनता में खौफ पैदा किया जा सके।
गौरतलब है कि फरवरी 2021 में देश की सेना द्वारा किए गए सैन्य तख्तापलट के बाद से ही म्यांमार एक भयंकर गृहयुद्ध की आग में जल रहा है। देश के अधिकांश हिस्सों पर अब विभिन्न विद्रोही समूहों और प्रजातांत्रिक ताकतों का कब्जा हो चुका है, जिससे सत्ता से बेदखल हुई सैन्य जुंटा पूरी तरह से आक्रामक हो गई है। सेना अपनी जमीनी पकड़ खोने के बाद अब अंधाधुंध हवाई हमलों और भारी गोलाबारी का सहारा ले रही है, जिसका खामियाजा सबसे ज्यादा देश के निर्दोष नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
इस क्रूर हमले के बाद रखाइन क्षेत्र और पूरे देश में भारी तनाव का माहौल है। विद्रोही संगठन ‘अराकान आर्मी’ ने इस नरसंहार की कड़ी निंदा करते हुए ऐलान किया है कि इस अमानवीय कृत्य का बदला लिया जाएगा और इसके लिए जिम्मेदार सैन्य नेतृत्व को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने म्यांमार की सेना द्वारा नागरिकों पर लगातार किए जा रहे इन हमलों पर गहरी चिंता जताते हुए इसे युद्ध अपराध करार दिया है और तत्काल हिंसा रोकने की पुरजोर मांग की है।

