छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए एक अभूतपूर्व पहल की शुरुआत की गई है। इस दिशा में, प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के अंतर्गत बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में क्लस्टर आधारित होमस्टे परियोजना को आधिकारिक रूप से स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत जशपुर के छह प्रमुख जनजातीय गांवों—किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ—का चयन किया गया है। इन सभी गांवों में पर्यटकों के ठहरने के लिए कुल 30 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे, जिसके तहत प्रत्येक चयनित गांव में 5 आधुनिक और पारंपरिक सुविधाओं से युक्त होमस्टे तैयार किए जाएंगे।
इस पूरे क्लस्टर के विकास और निर्माण कार्यों पर लगभग 1.80 करोड़ रुपये की राशि खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। इस बजट का उपयोग न केवल होमस्टे के निर्माण में किया जाएगा, बल्कि गांवों के स्तर पर आवश्यक सामुदायिक बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी इसमें प्राथमिकता दी गई है।
यह परियोजना पारंपरिक और व्यावसायिक होटल आधारित पर्यटन के दायरे से बाहर निकलकर कम्यूनिटी बेस्ड टूरिज्म को बढ़ावा देती है। इसके माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के बीच सीधे रहने का अवसर मिलेगा, जिससे वे जशपुर की अनूठी जनजातीय संस्कृति, खान-पान, लोक परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से अनुभव कर सकेंगे।
परियोजना के तहत प्रस्तावित होमस्टे स्थानीय परिवेश और पर्यटकों की सुख-सुविधाओं को पूरी तरह ध्यान में रखकर विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही, प्रत्येक गांव में सामुदायिक स्तर की विभिन्न सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए 5 लाख रुपये तक के बजट का प्रावधान किया गया है, जिससे सामूहिक उपयोग की आधारभूत संरचना मजबूत होगी।
यह होमस्टे क्लस्टर क्षेत्र के कई प्रमुख प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के बेहद करीब स्थित है। इनमें मुख्य रूप से कैलाश गुफा, खुड़ियारानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़ और लोरोघाट शामिल हैं, जिससे पर्यटकों को इन स्थलों पर घूमने के दौरान ठहरने के उत्कृष्ट विकल्प प्राप्त होंगे।
इस योजना का प्रभाव केवल आवास तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अनेक नए रास्ते खुलेंगे। आतिथ्य सेवा, पारंपरिक भोजन निर्माण, पर्यटक गाइड, परिवहन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार की प्राथमिकता जनजातीय संस्कृति और स्थानीय आजीविका को पर्यटन से जोड़ना है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस समुदाय-भागीदारी वाले मॉडल से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि जशपुर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान देश-दुनिया तक पहुंचेगी।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने भी इस दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े व्यावसायिक केंद्रों तक सीमित न रहकर सीधे गांवों और स्थानीय परिवारों तक पहुँचना चाहिए। यह होमस्टे क्लस्टर प्रकृति, संस्कृति और आजीविका का एक बेहतरीन संगम बनेगा, जिससे पर्यटकों को प्रामाणिक छत्तीसगढ़ी अनुभव प्राप्त होगा।

