केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आगामी 2029 से पहले देश के एनडीए शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने के ऐलान के बाद देश की सियासत गरमा गई है। इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमइन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने इस कदम को समानता स्थापित करने का प्रयास मानने से साफ इंकार किया है।
ओवैसी ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि यूसीसी लाने का असली मकसद देश में समानता लाना नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना है। उनके मुताबिक, इस तरह के कानून से देश की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना को नुकसान पहुंचेगा और यह एक विशेष वर्ग को हाशिए पर धकेलने का जरिया बन जाएगा।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ओवैसी ने कहा कि भारत की असली खूबसूरती उसकी विविधता, बहुलवाद और विभिन्न संस्कृतियों के सह-अस्तित्व में है। उन्होंने अंदेशा जताया कि यूसीसी के माध्यम से गैर-हिंदुओं पर बहुसंख्यक कानून थोपने का प्रयास किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों (विशेषकर अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29) की मूल भावना के विपरीत है।
असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी दलील को मजबूत करने के लिए पिछले विधि आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि विधि आयोग ने खुद यह बात कही थी कि भारत जैसे बहुसांस्कृतिक और विविधता से भरे देश में एक समान नागरिक संहिता न तो व्यावहारिक रूप से जरूरी है और न ही वर्तमान परिस्थितियों में वांछनीय है।
राजनीतिक चुनौती देते हुए ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी को घेरा और कहा कि अगर सरकार सचमुच समानता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है, तो उसे गोवा जैसे राज्य के कानूनों का भी मूल्यांकन करना चाहिए, जहां पहले से ही एक अलग व्यवस्था लागू है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या सरकार उत्तराखंड, असम या गुजरात की तरह गोवा में भी यूसीसी के नाम पर बदलाव लागू करने का साहस जुटाएगी?
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच ओवैसी ने एनडीए गठबंधन में शामिल क्षेत्रीय दलों और अन्य साझीदार पार्टियों की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एनडीए सहयोगियों से मुखातिब होते हुए पूछा कि क्या अब उनके पास अपनी कोई स्वतंत्र राजनीतिक पहचान या आवाज बची है, या फिर वे सिर्फ भाजपा के इशारे पर चलने वाले दल बनकर रह गए हैं?

