रक्षा मंत्रालय की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में भारत-चीन सीमा पर एक सकारात्मक बदलाव के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में चीनी पीएलए (PLA) की अग्रिम तैनाती में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
विश्लेषण के मुताबिक, चीन ने एलएसी के समीप विभिन्न मोर्चों से लगभग 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के आकार की सैन्य टुकड़ियों को पीछे हटाया है। सीमा के उस पार सैनिकों की संख्या में आई इस कमी को रणनीतिक हलकों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच, भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक एलएसी के सभी सेक्टरों में बेहद मजबूत, संतुलित और आक्रामक रूप से तैयार स्थिति में है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आकस्मिक चुनौती या सुरक्षा संबंधी खतरे से निपटने के लिए भारतीय बल पूरी तरह सक्षम हैं।
सैनिकों की तैनाती में यह नरमी दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से चल रही उच्च-स्तरीय कूटनीतिक और सैन्य वार्ताओं का परिणाम है। कोर कमांडर स्तर की बैठकों और राजनयिक माध्यमों से लगातार संवाद ने उत्तरी सीमाओं पर तनाव को कम करने और स्थिरता लाने में मदद की है।
हालांकि चीनी सैनिकों की संख्या में कमी आई है, लेकिन भारत की तरफ से सतर्कता में कोई ढील नहीं दी गई है। चीन ने अभी भी सीमा के पास भारी सैन्य हार्डवेयर, आधुनिक मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस और टैंकों की तैनाती बनाए रखी है।
इन्हीं जमीनी वास्ते और कूटनीतिक वार्ताओं के बीच, हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय मुलाकात हुई थी। इस उच्च-स्तरीय बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने और आपसी संवेदनशीलता का सम्मान करने पर जोर दिया था।
रक्षा मंत्रालय की यह रिपोर्ट बताती है कि भारत और चीन के बीच सीमाई तनाव कम होने की दिशा में प्रगति हुई है, लेकिन भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपनी उत्तरी सीमाओं पर पूरी तरह मुस्तैद और हाई अलर्ट पर बना हुआ है।

