मायानगरी मुंबई में लगातार बढ़ती आबादी और पानी की किल्लत से स्थायी रूप से निपटने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने एक बेहद महत्वाकांक्षी मेगा प्लान पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत अब अरब सागर के खारे पानी को मीठा बनाकर शहर की प्यास बुझाई जाएगी, जिसके लिए उत्तर-पश्चिमी उपनगर मनोरी में देश के सबसे बड़े डिसेलिनेशन प्लांट का निर्माण किया जा रहा है।
मुंबई को वर्तमान में अपनी दैनिक जरूरतों के लिए लगभग 4,600 से 4,665 मिलियन लीटर प्रति दिन (MLD) पानी की आवश्यकता होती है, जबकि झीलों और बांधों से कुल आपूर्ति करीब 4,100 MLD ही हो पाती है। इस मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने के लिए बीएमसी ने इस समुद्री परियोजना को अमलीजामा पहनाना शुरू किया है, ताकि मानसून की अनिश्चितता पर शहर की निर्भरता कम हो सके।
लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में फैला यह मनोरी प्लांट अत्याधुनिक रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) तकनीक पर आधारित होगा। परियोजना के पहले चरण में हर दिन 200 MLD शुद्ध पेयजल का उत्पादन किया जाएगा, जिसे बाद में विस्तार देकर 400 MLD तक बढ़ाया जा सकेगा। इस संयंत्र को स्थापित करने और इसके संचालन की जिम्मेदारी इजराइल की प्रसिद्ध कंपनी IDE टेक्नोलॉजीज और घरेलू फर्म GVPR इंजीनियर्स को सौंपी गई है।
समुद्र के खारे पानी को संयंत्र तक लाने और प्रक्रिया के बाद सुरक्षित रूप से अतिरिक्त गाद (Brine) को वापस समुद्र में छोड़ने के लिए विशेष टनल और डिफ्यूज़र सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं। पर्यावरण और समुद्री जीवों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए इन अंडरग्राउंड पाइपलाइनों और संरचनाओं को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को कोई नुकसान न पहुँचे।
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत उत्पादित मीठे पानी को मुंबई के मुख्य वितरण नेटवर्क तक पहुंचाने के लिए बीएमसी ने हाल ही में लगभग 2,241 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ी भूमिगत सुरंग के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। मनोरी से चारकोप और कांदिवली (महावीर नगर) तक बनने वाली यह करीब 7.2 किलोमीटर लंबी सुरंग पश्चिमी उपनगरों जैसे बोरिवली, कांदिवली और मलाड के जल वितरण को मजबूत करेगी।
पर्यावरण और स्थिरता के लिहाज से भी यह प्रोजेक्ट बेहद खास है क्योंकि इसके संचालन में होने वाली भारी-भरकम बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए इसे पूरी तरह से नवीकरणीय (ग्रीन एनर्जी) स्रोतों से जोड़े जाने का प्रावधान है। इससे इस प्लांट का कार्बन फुटप्रिंट न्यूनतम रहेगा और यह देश के अन्य तटीय शहरों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण बनेगा।
तमाम प्रशासनिक मंजूरियों और टेंडर प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद इस विशाल परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2029 तक यह पूरा प्रोजेक्ट पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देगा, जिसके बाद अरब सागर का पानी मायानगरी के घरों तक आसानी से नल के जरिए पहुंचने लगेगा और मुंबई की जल सुरक्षा हमेशा के लिए पुख्ता हो जाएगी।

