दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के बीच प्रबंधन ने फिलहाल नए टर्मिनल के निर्माण की किसी भी तत्काल योजना से इनकार किया है। डायल (DIAL) से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बहुप्रतीक्षित टर्मिनल-4 (T4) की परियोजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। एयरपोर्ट प्रशासन का पूरा ध्यान नए ढांचे के बजाय मौजूदा टर्मिनलों की क्षमता का अधिकतम उपयोग करने और यात्रियों की आवाजाही को अधिक से अधिक सुगम बनाने पर केंद्रित है।
हाल ही में टर्मिनल-1 (T1) के नए एकीकृत ढांचे की शुरुआत और टर्मिनल-3 (T3) के विस्तार के बाद दिल्ली एयरपोर्ट की कुल सालाना यात्री क्षमता 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। इस बड़ी क्षमता के विस्तार के बाद वर्तमान समय में किसी भी नए टर्मिनल की व्यावहारिक आवश्यकता महसूस नहीं की जा रही है। एयरपोर्ट प्रबंधन का मानना है कि मौजूदा बुनियादी ढांचे में अभी और अधिक यात्रियों को संभालने की पर्याप्त गुंजाइश है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए DIAL द्वारा वर्ष 2026-2036 के नए मास्टर प्लान पर तेजी से काम किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत एयरपोर्ट की कुल वार्षिक यात्री क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर करीब 14 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब भविष्य में यात्रियों की संख्या इस नए निर्धारित लक्ष्य को पार करने लगेगी, तभी T4 परियोजना को फिर से सक्रिय करने पर विचार किया जाएगा।
मास्टर प्लान में भविष्य के लिए एक बेहद अहम विकल्प भी तैयार रखा गया है। यदि आने वाले समय में सचमुच T4 की अनिवार्यता महसूस होती है, तो मौजूदा टर्मिनल-2 (T2) को पूरी तरह हटाकर उसी स्थान पर एक अत्यंत आधुनिक और विशाल टर्मिनल-4 का निर्माण किया जा सकता है। यह संभावित प्रक्रिया वर्ष 2030 के बाद ही धरातल पर उतरने की उम्मीद है। तब तक T2 और T3 पूरी तरह सामान्य रूप से यात्रियों के लिए संचालित होते रहेंगे।
वर्तमान में DIAL का सबसे बड़ा फोकस विभिन्न टर्मिनलों के बीच की दूरी को पाटने वाली परियोजनाओं पर है। T1, T2 और T3 के बीच लगभग 9 किलोमीटर की लंबी अंतर-टर्मिनल दूरी को आसान और तेज बनाने के लिए ‘एयर ट्रेन’ जैसी अत्याधुनिक व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। यह प्रस्तावित व्यवस्था विभिन्न उड़ानों के बीच ट्रांजिट करने वाले यात्रियों के कीमती समय को बचाने में काफी मददगार साबित होगी।
आने वाले 2026-2036 के मास्टर प्लान में कई अन्य दूरदर्शी बदलावों को भी शामिल किए जाने की पूरी संभावना है। इसमें एयर ट्रेन प्रोजेक्ट को जल्द अंतिम मंजूरी मिलने के साथ-साथ देश की प्रमुख एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया और इंडिगो के लिए एक समर्पित (डेडीकेटेड) टर्मिनल की मांग पर विचार करना भी शामिल है। इसके अलावा, T3 के पियर-सी के प्रभावी इस्तेमाल से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की क्षमता को और अधिक बढ़ाने की पुख्ता तैयारी की जा रही है।
जेवर (नोएडा इंटरनेशनल) एयरपोर्ट की ओर से भविष्य में मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए भी रणनीति बनाई जा रही है। इन तमाम बदलावों का मुख्य उद्देश्य दिल्ली एयरपोर्ट को दुनिया भर के नक्शे पर एक मजबूत ग्लोबल ट्रांसफर हब के रूप में बरकरार रखना है।
डायल (DIAL) का यह नया और बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान 2026-2036 अगले एक-दो महीनों के भीतर आधिकारिक रूप से जनता और उद्योग के सामने लाए जाने की पूरी उम्मीद है। इस योजना के लागू होने से दिल्ली एयरपोर्ट की कार्यक्षमता में और अधिक सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।

