तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम (TVK), सत्ता के शिखर पर पहुँचती नजर आ रही है। हालिया विधानसभा चुनावों के बाद बने समीकरणों ने राज्य की पारंपरिक राजनीति को हिलाकर रख दिया है। विजय की पार्टी को अब कांग्रेस, VCK, CPI और CPI-M जैसे महत्वपूर्ण दलों का समर्थन मिल गया है, जिसके बाद गठबंधन ने बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 पार करने का दावा किया है।
सत्ता के इस संघर्ष में राजभवन केंद्र बिंदु बन गया है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विजय के सरकार बनाने के दावे को फिलहाल दूसरी बार खारिज कर दिया है। राज्यपाल का कहना है कि वे केवल मौखिक दावे या गठबंधन की घोषणा के आधार पर न्योता नहीं दे सकते। उन्होंने विजय को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सभी 118 विधायकों के व्यक्तिगत हस्ताक्षरों वाली सूची पेश करें, ताकि बहुमत की पुष्टि की जा सके। हालांकि, स्थिति को तनावपूर्ण देखते हुए राज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि वे फिलहाल किसी अन्य दल को सरकार बनाने के लिए नहीं बुलाएंगे।
इस राजनीतिक गतिरोध के बीच कांग्रेस ने काफी आक्रामक रुख अपना लिया है। शुक्रवार को तमिलनाडु कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पूरे राज्य में राजभवन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि राज्यपाल केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम कर रहे हैं और सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने से रोककर लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। चेन्नई की सड़कों पर उतरे कांग्रेस नेताओं ने इसे “राजभवन का राजनीतिकरण” करार दिया है।
प्रदर्शनों की आग केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं रही, बल्कि TVK के हजारों समर्थक भी चेन्नई की सड़कों पर उतर आए। राजभवन (लोकभवन) के सामने भारी नारेबाजी और प्रदर्शन के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई। समर्थकों का आरोप है कि DMK और AIADMK जैसी स्थापित पार्टियां पर्दे के पीछे से हाथ मिलाकर विजय को सत्ता से बाहर रखने की साजिश रच रही हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उधगमंडलम सीट से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक भोजराजन ने साफ किया है कि इस राजनीतिक संकट पर कोई भी बड़ा फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही लेगा। उन्होंने स्थानीय स्तर पर किसी भी गठबंधन या समर्थन की संभावनाओं पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। भाजपा की यह ‘इंतजार करो और देखो’ वाली नीति राज्य के राजनीतिक भविष्य को और अधिक रहस्यमयी बना रही है।
234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में 118 का आंकड़ा सत्ता की चाबी है। यदि TVK अपने सहयोगियों के साथ मिलकर राज्यपाल की शर्त पूरी कर देती है, तो राज्य में दशकों पुराने द्रविड़ वर्चस्व के बीच एक नई राजनीतिक व्यवस्था का उदय होगा। वर्तमान में, सभी की निगाहें उन 118 विधायकों की परेड और हस्ताक्षरों पर टिकी हैं, जो विजय की किस्मत और तमिलनाडु की नई सरकार का भविष्य तय करेंगे।

