नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने नकली जीवन रक्षक दवाओं के इस काले कारोबार का भंडाफोड़ करते हुए गिरोह के सरगना समेत चार प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में चल रही एक अवैध फैक्ट्री का भी खुलासा हुआ है, जहाँ बड़े पैमाने पर दवाओं की री-पैकेजिंग का काम किया जा रहा था।
पुलिस की यह कार्रवाई एक विशेष सूचना के बाद शुरू हुई। क्राइम ब्रांच की ईस्टर्न रेंज-1 टीम को खबर मिली थी कि एक संगठित गिरोह सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित दवाओं को अवैध रूप से प्राप्त कर, उनके सरकारी लेबल हटाकर बाजार में महंगे दामों पर बेच रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए एसीपी सुनील श्रीवास्तव की निगरानी में ड्रग कंट्रोल विभाग के साथ एक संयुक्त टीम बनाई गई और 22 अप्रैल 2026 को छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
जांच के दौरान टीम ने मुखर्जी नगर की इंद्र विकास कॉलोनी में स्थित एक मकान पर धावा बोला। यहाँ का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। यह साधारण दिखने वाला मकान असल में एक अवैध ड्रग फैक्ट्री में तब्दील हो चुका था। मौके से पुलिस ने करीब 6 करोड़ रुपये मूल्य की नकली दवाएं, भारी मात्रा में ब्रांडेड लेबल और दवाओं की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली चार आधुनिक मशीनें बरामद कीं।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मनोज कुमार जैन, राजू कुमार, विक्रम सिंह उर्फ सनी और वतन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, 56 वर्षीय मनोज कुमार जैन इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड है जो दिल्ली से सारा ऑपरेशन संभाल रहा था। वहीं, राजू कुमार पंचकूला से और विक्रम व वतन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से इस गिरोह के लिए काम कर रहे थे।
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य विक्रम और वतन प्रयागराज के सरकारी अस्पतालों से मिलीभगत कर दवाओं को अवैध रूप से बाहर निकालते थे। इन दवाओं को बाद में दिल्ली स्थित मुखर्जी नगर की यूनिट में लाया जाता था। यहाँ दवाओं के असली सरकारी लेबल हटाकर उन पर नामी कंपनियों के नकली लेबल लगा दिए जाते थे, ताकि उन्हें खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा सके।
बरामद की गई दवाओं की सूची बेहद चौंकाने वाली है। पुलिस ने मौके से रेबीज वैक्सीन, इंसुलिन, हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली लेंवाटिनिब कैप्सूल जैसी दवाएं जब्त की हैं। इसके अलावा सांप के काटने के इलाज में काम आने वाला ‘स्नेक वेनम एंटीसीरम’ और जीवन रक्षक ‘ह्यूमन एल्ब्यूमिन’ भी भारी मात्रा में बरामद हुआ है, जिनका नकली होना मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस गिरोह की जड़ें कोविड काल से ही गहरी जमी हुई थीं। आरोपी राजू कुमार ने महामारी के दौरान ही नकली दवाओं का अवैध धंधा शुरू किया था और पंजाब के डेराबस्सी में एक यूनिट भी स्थापित की थी। वहीं, विक्रम सिंह प्रयागराज में एक डायग्नोस्टिक सेंटर की आड़ में सरकारी दवाओं की चोरी और तस्करी के नेटवर्क को अंजाम दे रहा था।
इस गिरोह का नेटवर्क केवल दिल्ली-एनसीआर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि यह कोलकाता, गुवाहाटी और इंफाल जैसे पूर्वोत्तर राज्यों तक फैला हुआ था। प्रयागराज से डायवर्ट की गई सरकारी दवाओं को नकली पहचान देकर इन राज्यों के थोक बाजारों में खपाया जा रहा था। पुलिस को इस पूरे गोरखधंधे में हवाला के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन के पुख्ता संकेत मिले हैं।
फिलहाल, पुलिस ने चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है, क्योंकि वैक्सीन और एंटी-सीरम जैसी दवाओं के साथ छेड़छाड़ सीधे तौर पर मृत्यु का कारण बन सकती है। पुलिस अब उन मेडिकल स्टोर और वितरकों की पहचान करने में जुटी है, जो इस गिरोह से नकली दवाएं खरीद रहे थे।

