इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन के रोमांच के बीच भारतीय खेल जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। राजस्थान रॉयल्स, जो IPL के पहले सीजन की विजेता रही है, अब एक नए मालिकाना हक के तहत आने वाली है। दुनिया के दिग्गज स्टील कारोबारी लक्ष्मी निवास मित्तल और उनके बेटे आदित्य मित्तल ने वैक्सीन किंग अदार पूनावाला के साथ मिलकर इस फ्रेंचाइजी को खरीदने का एक बड़ा समझौता किया है। यह सौदा भारतीय खेल इतिहास के सबसे महंगे समझौतों में से एक माना जा रहा है।
इस सौदे की वित्तीय बारीकियों की बात करें तो इसकी कुल कीमत लगभग 1.65 बिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गई है, जो भारतीय रुपयों में करीब 15,660 करोड़ रुपये होती है। यह भारी-भरकम राशि यह स्पष्ट करती है कि IPL की वैल्यूएशन अब वैश्विक स्तर पर फुटबॉल की प्रीमियम लीग्स को टक्कर दे रही है। इस डील के साथ ही राजस्थान रॉयल्स की बाजार में हैसियत कई गुना बढ़ गई है और मित्तल परिवार का नाम अब खेल के वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से उभर कर सामने आया है।
दिलचस्प बात यह है कि यह सौदा केवल भारत की राजस्थान रॉयल्स टीम तक ही सीमित नहीं है। इस अधिग्रहण के तहत मित्तल परिवार और पूनावाला को ‘रॉयल्स’ ग्रुप की अन्य अंतरराष्ट्रीय टीमें भी मिलेंगी। इसमें दक्षिण अफ्रीका की पार्ल रॉयल्स और कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) की बारबाडोस रॉयल्स शामिल हैं। यानी एक ही झटके में यह नया समूह तीन अलग-अलग देशों की बड़ी क्रिकेट लीग्स में अपनी पैठ बना लेगा, जिससे उनकी ब्रांड वैल्यू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ेगी।
इससे पहले भी राजस्थान रॉयल्स को लेकर बाजार में कई तरह की चर्चाएं गर्म थीं। कुछ समय पहले खबर आई थी कि काल सोमानी के नेतृत्व में एक अमेरिकी निवेश समूह इस टीम को खरीदने की दौड़ में सबसे आगे है, लेकिन किन्हीं कारणों से वह बातचीत अंतिम अंजाम तक नहीं पहुंच सकी। अंततः मित्तल परिवार की गहरी दिलचस्पी और बड़े निवेश के प्रस्ताव ने इस दौड़ को जीत लिया, जिससे टीम का नियंत्रण वापस भारतीय मूल के बड़े उद्योगपतियों के पास आ गया है।
मालिकाना हक के नए ढांचे के अनुसार, मित्तल परिवार के पास करीब 75% हिस्सेदारी होगी, जिससे वे टीम के मुख्य प्रमोटर बन जाएंगे। वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला लगभग 18% हिस्सेदारी के साथ बोर्ड में एक महत्वपूर्ण निवेशक के रूप में मौजूद रहेंगे। शेष 7% हिस्सेदारी वर्तमान निवेशकों के पास रहेगी, जिसमें मनोज बडाले शामिल हैं। मनोज बडाले, जिन्होंने लंबे समय तक इस फ्रेंचाइजी का नेतृत्व किया है, वे टीम के साथ जुड़े रहेंगे और अपने अनुभव से प्रबंधन में मदद करते रहेंगे।
हालांकि इस डील पर अभी पूरी तरह मुहर लगना बाकी है। किसी भी बड़े कॉर्पोरेट सौदे की तरह, इसे भी भारत के क्रिकेट नियामक बोर्ड BCCI, कम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) और IPL गवर्निंग काउंसिल से हरी झंडी मिलना अनिवार्य है। जानकारों का मानना है कि इन सभी कानूनी और नियामक प्रक्रियाओं को पूरा करने में थोड़ा समय लगेगा और उम्मीद है कि 2026 की तीसरी तिमाही तक यह अधिग्रहण आधिकारिक रूप से पूरी तरह से संपन्न हो जाएगा।
अपनी नई भूमिका को लेकर लक्ष्मी निवास मित्तल ने भावनात्मक जुड़ाव व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि चूंकि वे मूल रूप से राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए इस राज्य की टीम का मालिक बनना उनके लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है। वहीं आदित्य मित्तल ने IPL को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती स्पोर्ट्स लीग बताते हुए अपनी खुशी जाहिर की। अदार पूनावाला ने भी टीम की विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया है, जिससे फैंस के बीच टीम के भविष्य को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।
अंत में, यह मेगा-डील इस बात का प्रमाण है कि क्रिकेट अब केवल मैदान पर खेला जाने वाला खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अरबों डॉलर का ग्लोबल बिजनेस बन चुका है। मित्तल और पूनावाला जैसे बड़े औद्योगिक घरानों का क्रिकेट में प्रवेश यह संकेत देता है कि आने वाले समय में IPL की आर्थिक शक्ति और इसके चारों ओर का इकोसिस्टम और भी अधिक पेशेवर और विशाल होने वाला है।

