छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर आई है। प्रदेश के मौसम में अचानक हुए इस बदलाव ने पारे की रफ्तार पर लगाम लगा दी है। राजधानी रायपुर समेत राज्य के कई हिस्सों में शनिवार शाम को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया, जहां दिन भर की तपिश के बाद तेज अंधड़ और बादलों की लुका-छिपी ने वातावरण में ठंडक घोल दी। मौसम विभाग के अनुसार, यह बदलाव एक सक्रिय द्रोणिका के कारण हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में गर्मी से और अधिक राहत मिलने की उम्मीद है।
वर्तमान मौसमी प्रणाली की बात करें तो एक पूर्व-पश्चिम द्रोणिका (ट्रफ) पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम तक फैली हुई है। इस सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश के वायुमंडल में नमी आ रही है, जो गरज-चमक और बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रही है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 24 घंटों तक तापमान स्थिर रहेगा, लेकिन उसके बाद अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से निजात मिलेगी।
रायपुर मौसम केंद्र ने विशेष रूप से 4 और 5 मई को लेकर चेतावनी जारी की है। इन दो दिनों में प्रदेश के लगभग सभी संभागों में मौसम की गतिविधियां तेज होने के आसार हैं। विभाग के मुताबिक, एक-दो स्थानों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही मेघगर्जन, हल्की बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की भी प्रबल संभावना जताई गई है। रविवार को भी राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी और तेज हवाओं का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है।
तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो राजनांदगांव 43.5 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म इलाका बना रहा। वहीं, उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में भी पिछले कुछ दिनों में तापमान में 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी देखी गई थी। हालांकि, रायपुर में 3 मई को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और हल्की बारिश होने की संभावना है, जिससे यहां का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास सिमट सकता है। शाम के समय चलने वाली ठंडी हवाएं रात के तापमान को भी सुखद बनाएंगी।
प्रशासन और मौसम विभाग ने इस बदलते मौसम के बीच आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज अंधड़ और बिजली चमकने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को कहा गया है, विशेषकर पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी कटी हुई फसलों और मंडियों में रखे अनाज को सुरक्षित कर लें, ताकि अचानक होने वाली बारिश या तेज हवाओं से किसी भी प्रकार के नुकसान से बचा जा सके।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में यह “नौतपा” से पहले की राहत भरी फुहार मानी जा रही है। यदि द्रोणिका का प्रभाव इसी तरह बना रहा, तो मई के पहले सप्ताह में लोगों को मई वाली पारंपरिक गर्मी का अहसास कम होगा। हालांकि, आर्द्रता बढ़ने के कारण उमस की स्थिति बन सकती है, लेकिन तापमान में गिरावट से राहत निश्चित है। फिलहाल प्रदेशवासी इस बदले हुए खुशनुमा मौसम का आनंद ले रहे हैं।

