असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा अवैध घुसपैठियों के खिलाफ दी गई एक तीखी टिप्पणी ने भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा कर दिया है। मुख्यमंत्री सरमा ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कुछ धुंधली तस्वीरें साझा करते हुए जानकारी दी थी कि असम पुलिस ने 20 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़कर वापस सीमा पार भेज दिया है। उनके इस पोस्ट में इस्तेमाल किए गए मुहावरे और सख्त लहजे ने ढाका में राजनीतिक गलियारों को नाराज कर दिया है।
मुख्यमंत्री सरमा ने अपने पोस्ट में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए लिखा था कि “लातों के भूत बातों से नहीं मानते।” उन्होंने स्पष्ट किया कि असम प्रशासन घुसपैठियों के खिलाफ अभियान जारी रखेगा और जो खुद से नहीं जाएंगे, उन्हें बलपूर्वक बाहर निकाला जाएगा। सरमा के इस बयान को असम में घुसपैठ के प्रति उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे एक पड़ोसी देश के प्रति अपमानजनक भाषा के रूप में लिया गया।
इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका में तैनात भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब किया। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के महानिदेशक (दक्षिण एशिया) इशरत जहां ने भारतीय राजनयिक के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया। बांग्लादेश ने इस बात पर जोर दिया कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह के सार्वजनिक बयान दोनों देशों के बीच के ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
बांग्लादेश की ओर से यह भी कहा गया कि संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दों, जैसे कि सीमा प्रबंधन और नागरिकता, पर बात करते समय संयम बरतना अनिवार्य है। बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के अपमानजनक बयान न केवल कूटनीतिक मर्यादा का उल्लंघन हैं, बल्कि इनसे सीमा पर रहने वाली आबादी के बीच भी तनाव पैदा होने की आशंका रहती है। उन्होंने भारत सरकार से उम्मीद जताई कि ऐसे बयानों पर रोक लगाई जाएगी जो आपसी सहयोग के माहौल को बिगाड़ते हों।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब भारत और बांग्लादेश अपने रिश्तों को एक नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के बीच काफी तल्खी देखी गई थी, विशेषकर हिंदुओं और मंदिरों पर हुए हमलों के बाद। हालांकि, फरवरी 2026 में तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद से संबंधों को पटरी पर लाने के प्रयास तेज हुए थे।
हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की भारत यात्रा और एस. जयशंकर के साथ उनकी सकारात्मक बातचीत के बाद उम्मीद जगी थी कि रिश्ते सामान्य हो रहे हैं। लेकिन हिमंत बिस्वा सरमा के ताजा बयान और उस पर बांग्लादेश की तीखी प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि घुसपैठ का मुद्दा अभी भी दोनों देशों के बीच एक अत्यंत संवेदनशील और जटिल मुद्दा बना हुआ है, जो जरा सी चिंगारी से कूटनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।

