ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने एक अत्यंत कड़ा और स्पष्ट लिखित बयान जारी कर पूरी दुनिया को ईरान की भावी रणनीति के संकेत दे दिए हैं। सरकारी टेलीविजन पर पढ़कर सुनाए गए इस संदेश में खामेनेई ने घोषणा की कि उनका देश अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं से किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने इन सैन्य और वैज्ञानिक शक्तियों को ईरान की “राष्ट्रीय पूंजी” करार दिया और कहा कि इनकी रक्षा करना देश की क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं की रक्षा करने जैसा ही अनिवार्य है।
खामेनेई ने अपने संबोधन में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को केंद्र में रखते हुए कहा कि इस रणनीतिक क्षेत्र में अब एक “नया दौर” शुरू हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विदेशी दखलअंदाजी कम होने से यह इलाका भविष्य में शांति, तरक्की और बड़े आर्थिक लाभ का केंद्र बनेगा। उन्होंने होर्मुज को सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि ईरान की सभ्यता और पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बताया, जिसने सदियों से ईरान की ताकत को बनाए रखा है।
अमेरिका पर तीखा प्रहार करते हुए मुजतबा खामेनेई ने पश्चिमी देशों के सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सैन्य ठिकाने खुद अपनी सुरक्षा करने में असमर्थ हैं और बेहद कमजोर स्थिति में हैं। खामेनेई ने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि जो देश अपने ठिकानों को सुरक्षित नहीं रख सकता, वह क्षेत्र के अन्य देशों को सुरक्षा की गारंटी कैसे दे सकता है। उन्होंने खाड़ी देशों को आगाह किया कि अमेरिका पर निर्भरता उन्हें केवल अस्थिरता की ओर ले जाएगी।
ईरान की सैन्य प्रगति का जिक्र करते हुए सुप्रीम लीडर ने नैनो और बायो-टेक्नोलॉजी से लेकर आधुनिक मिसाइल और ड्रोन हथियारों तक की सराहना की। उन्होंने कहा कि 90 मिलियन ईरानी जनता अपनी पहचान और वैज्ञानिक उपलब्धियों पर गर्व करती है और वे किसी भी बाहरी दबाव में आकर अपनी “आध्यात्मिक और औद्योगिक” ताकत का त्याग नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की परमाणु शक्ति उसके आत्मसम्मान का प्रतीक है और इसे ‘शैतानी ताकतों’ के आगे नहीं झुकाया जा सकता।
क्षेत्रीय राजनीति के संदर्भ में खामेनेई का रुख कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने पड़ोसी सुन्नी देशों की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए कहा कि ईरान उनके साथ एक जैसा भाग्य साझा करता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान की असली दुश्मनी ‘महान शैतान’ अमेरिका और इजरायल (जियोनिज्म) से है। इस बयान के जरिए उन्होंने क्षेत्र में “मुस्लिम एकता” का आह्वान किया और पड़ोसी देशों को अमेरिकी प्रभाव से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की।
होर्मुज क्षेत्र के इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सदियों में यूरोपीय और अमेरिकी “लुटेरों” ने इस इलाके पर बार-बार हमले किए हैं, जिससे असुरक्षा और भारी नुकसान हुआ है। खामेनेई ने वर्तमान परिस्थितियों को अमेरिका की एक और “साजिश” बताया, जिसे उन्होंने ‘तलवार लहराना’ करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अब किसी भी विदेशी हमले या दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है, क्योंकि हजारों शहीदों के बलिदान ने देश को झुकना नहीं सिखाया।
सुप्रीम लीडर ने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की जो “अमेरिका मुक्त” हो। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा से फारस की खाड़ी का उज्ज्वल भविष्य बिना किसी अमेरिकी हस्तक्षेप के संभव होगा, जहाँ इलाके के देश अपनी भलाई और विकास के लिए खुद समर्पित होंगे। उनका मानना है कि जब विदेशी सेनाएं इस क्षेत्र को छोड़ देंगी, तभी असली शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
खामेनेई के इस सख्त रुख ने अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल तेज कर दी है। परमाणु समझौते और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अमेरिका और सुन्नी बहुल देशों की प्रतिक्रिया का अब बेसब्री से इंतजार है। इस बयान से यह तो साफ हो गया है कि ईरान अपनी परमाणु शर्तों पर अडिग है और वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में पश्चिमी देशों के साथ तनाव और बढ़ सकता है।

