दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक अत्यंत सतर्कतापूर्ण ऑपरेशन चलाते हुए देश के विभिन्न हिस्सों से चार संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार कर एक बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस की इस स्पेशल सेल टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर विनय पाल और मनोज कुमार कर रहे थे, जबकि पूरे ऑपरेशन की निगरानी एसीपी आशीष कुमार द्वारा की गई। गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों के पास से आईईडी (IED) बनाने का सामान और संदिग्ध मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जो इनके खतरनाक मंसूबों की तस्दीक करते हैं।
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह ऑपरेशन केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में एक साथ अंजाम दिया गया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोसाइब अहमद उर्फ सोनू (ठाणे), मोहम्मद हम्माद (मुंबई), शेख इमरान (भुवनेश्वर) और मोहम्मद सोहेल (कटिहार) के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी अलग-अलग क्षेत्रों से ताल्लुक रखते थे, लेकिन एक ही विचार और खतरनाक नेटवर्क से आपस में जुड़े हुए थे।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये चारों युवक कट्टरपंथी विचारधारा से पूरी तरह प्रभावित थे। ये लोग न केवल खुद देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे, बल्कि ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसे खतरनाक विचारों का प्रचार कर अन्य युवाओं को भी उकसाने का काम कर रहे थे। पुलिस का मानना है कि इन लोगों का मुख्य उद्देश्य समाज में नफरत फैलाना और देश की शांति को भंग करने के लिए आतंकी वारदातों को अंजाम देना था।
इस मॉड्यूल की सबसे खतरनाक बात यह थी कि इन्होंने आतंकी हमले के लिए जमीनी स्तर पर तैयारी शुरू कर दी थी। आरोपी हम्माद और मोसाइब स्थानीय स्तर पर आईईडी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री जुटा रहे थे। तकनीकी रूप से सक्रिय मोसाइब ने एक रिमोट कंट्रोल कार के सर्किट में बदलाव करके विस्फोटक उपकरण तैयार करने की दिशा में काफी काम कर लिया था। यदि समय रहते इन्हें नहीं पकड़ा जाता, तो यह एक बड़े जान-माल के नुकसान का कारण बन सकता था।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे चिंताजनक पहलू ‘रेकी’ का सामने आना है। जांच के दौरान पता चला कि ओडिशा से पकड़ा गया शेख इमरान दिल्ली आया था और उसने लाल किला तथा इंडिया गेट जैसे बेहद संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थानों की रेकी की थी। इतना ही नहीं, उसने अपने नेटवर्क के साथियों को हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिलाने और अन्य साजो-सामान की व्यवस्था करने का दावा भी किया था, जिससे स्पष्ट होता है कि वे दिल्ली को निशाना बनाने की फिराक में थे।

आर्थिक मदद और नेटवर्किंग के लिए यह समूह आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा था। बिहार का रहने वाला मोहम्मद सोहेल सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भड़काने के साथ-साथ फंड जुटाने का काम भी देख रहा था। उसने अपने निजी बैंक खातों और क्यूआर कोड का उपयोग कर पैसे इकट्ठा करने की कोशिश की थी। ये सभी आरोपी एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचे रह सकें।
हैरानी की बात यह है कि ये सभी आरोपी साधारण सामाजिक पृष्ठभूमि से आते हैं और बहुत अधिक शिक्षित नहीं हैं। इनमें से अधिकांश ने केवल 10वीं तक की पढ़ाई की है और अपनी आजीविका चलाने के लिए मैकेनिक, सिक्योरिटी गार्ड और प्लंबर जैसे काम करते थे। जांच अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर मौजूद कट्टरपंथी भाषणों और नफरती सामग्री ने इन साधारण युवाओं के दिमाग में जहर घोल दिया, जिसके बाद वे देश विरोधी गतिविधियों के रास्ते पर चल पड़े।
डीसीपी स्पेशल सेल प्रवीण कुमार त्रिपाठी के मुताबिक, समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक बड़ी आतंकी साजिश को विफल कर दिया गया है। फिलहाल, स्पेशल सेल ने इन चारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इनके मोबाइल फोन के डेटा को रिकवर कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके पीछे कौन से बड़े हैंडलर काम कर रहे थे और क्या इनका संबंध किसी अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन से है।

