हाल ही में भारत की दो दिग्गज कंपनियों, TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) और लेंसकार्ट, को लेकर सोशल मीडिया और खबरों में भारी विवाद देखने को मिला है। ये विवाद धार्मिक पहचान, कार्यस्थल की नीतियों और कर्मचारियों के व्यक्तिगत आचरण से जुड़े हैं। जहाँ एक ओर टाटा जैसी प्रतिष्ठित कंपनी के नासिक दफ्तर में यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोप लगे हैं, वहीं दूसरी ओर लेंसकार्ट अपने ‘ड्रेस कोड’ को लेकर जनता के निशाने पर आ गई है।
TCS नासिक का मामला तब सुर्खियों में आया जब वहाँ के दफ्तर में कथित तौर पर ‘लव जिहाद’ और यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई। खबरों के मुताबिक, एक महिला कर्मचारी के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया गया, बल्कि उस पर धर्म बदलने का दबाव भी बनाया गया। कॉर्पोरेट जगत में इस तरह के गंभीर आरोपों ने सबको चौंका दिया है, क्योंकि आमतौर पर आईटी कंपनियों में इस तरह के मामले कम ही देखे जाते हैं।
विवाद इतना उग्र हो गया कि स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और हंगामे की स्थिति बन गई। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए, TCS प्रबंधन ने एहतियाती कदम उठाते हुए नासिक दफ्तर के सभी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) पर भेज दिया है। कंपनी का प्राथमिक उद्देश्य अपने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए माहौल तैयार करना है। फिलहाल यह दफ्तर अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया है।
दूसरी तरफ, मशहूर आईवियर ब्रांड लेंसकार्ट के एक कथित ‘स्टाइल गाइड’ ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब कंपनी की ड्रेस कोड पॉलिसी का 11वां पन्ना इंटरनेट पर वायरल हुआ। इसमें आरोप लगाया गया कि कंपनी अपने कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोक रही है, जबकि हिजाब और पगड़ी जैसे अन्य धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति दी गई है।
इस स्टाइल गाइड में सिंदूर को लेकर भी कड़े निर्देश होने की बात कही गई, जिसमें लिखा था कि यदि कोई महिला सिंदूर लगाती है, तो वह बहुत कम होना चाहिए और माथे पर प्रमुखता से नहीं दिखना चाहिए। इसके अलावा, किसी भी तरह की कैप या हैट पहनने की मनाही थी। इस खबर के वायरल होते ही लोगों ने सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और इसे पक्षपाती नीति करार दिया।
विवाद बढ़ता देख फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी कंपनी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि एक भारतीय कंपनी में बिंदी और तिलक पर प्रतिबंध लगाना और हिजाब को अनुमति देना स्वीकार्य नहीं है। इस विरोध के बाद कंपनी की ब्रांड इमेज पर खतरा मंडराने लगा, जिसके बाद कंपनी के फाउंडर और सीईओ पीयूष बंसल को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी।
पीयूष बंसल ने स्पष्ट किया कि जो दस्तावेज सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं, वे पुराने और गलत हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि कंपनी की वर्तमान ग्रूमिंग पॉलिसी में किसी भी तरह की धार्मिक आस्था पर कोई पाबंदी नहीं है। बंसल के अनुसार, कर्मचारी बिंदी, तिलक और कलावा पहनने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं और कंपनी सभी धर्मों और संस्कृतियों का समान रूप से सम्मान करती है।
व्यावसायिक दृष्टि से देखें तो लेंसकार्ट एक बेहद सफल स्टार्टअप है, जिसका नेट प्रॉफिट जनवरी में 1.31 अरब रुपये तक पहुँच गया है। शार्क टैंक इंडिया के जरिए पीयूष बंसल घर-घर में पहचाने जाते हैं और उनकी कंपनी का वैल्यूएशन 5.6 अरब डॉलर के करीब है। ऐसे में इस तरह के विवाद कंपनी की साख के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।
इन दोनों घटनाओं ने यह बहस छेड़ दी है कि आधुनिक कॉर्पोरेट दफ्तरों में धार्मिक स्वतंत्रता और पेशेवर ड्रेस कोड के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। जहाँ TCS का मामला कानूनी जांच के दायरे में है, वहीं लेंसकार्ट ने अपनी छवि सुधारने के लिए स्पष्टीकरण जारी कर दिया है। फिलहाल दोनों ही मामलों ने देशभर के कामकाजी पेशेवरों और आम जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

