रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ महतारी वंदन योजना के तहत ई-केवायसी (e-KYC) अनिवार्य किए जाने के बाद से हितग्राही महिलाएं भारी मुश्किलों का सामना कर रही हैं। शासन द्वारा पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह प्रक्रिया फिलहाल महिलाओं के लिए सिरदर्द बन गई है। जिले में पिछले सात दिनों से योजना का आधिकारिक पोर्टल बंद पड़ा है, जिसके कारण हजारों महिलाएं अपना सत्यापन नहीं करा पा रही हैं।
समस्या की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दूर-दराज के गांवों से चिलचिलाती धूप में महिलाएं शहर के जनसेवा केंद्रों और निगम दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। पोर्टल ओपन नहीं होने के कारण उन्हें हर दिन खाली हाथ निराश होकर लौटना पड़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि वे पिछले एक हफ्ते से लगातार चक्कर लगा रही हैं, लेकिन तकनीकी खराबी के नाम पर उन्हें टाल दिया जाता है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
इस बार ई-केवायसी न होने का सीधा असर महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है। हितग्राही महिलाओं जैसे (परिवर्तित नाम) मधु देवांगन और सुशीला सोनी ने बताया कि केवाईसी अपडेट नहीं होने की वजह से इस महीने उनके खाते में योजना के तहत मिलने वाली 1,000 रुपये की राशि जमा नहीं हुई है। कई परिवारों के लिए यह राशि घरेलू खर्चों में बड़ी मदद होती थी, जो पोर्टल की खराबी के कारण इस बार अटक गई है।
प्रशासनिक स्तर पर जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि पिछले वेरिफिकेशन में जिले की लगभग 2,000 मृत महिलाओं के नाम सूची में पाए गए थे, जिन्हें अब हटा दिया गया है। इसी गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकार ने अब सभी 2,27,182 हितग्राहियों के लिए ई-केवायसी अनिवार्य कर दिया है। शासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खजाने का पैसा केवल पात्र और जीवित महिलाओं तक ही पहुंचे।
इधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल में कुछ गंभीर तकनीकी त्रुटियां आ गई हैं, जिन्हें ठीक करने के लिए तकनीकी टीम जुटी हुई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि पोर्टल को जल्द ही फिर से चालू कर दिया जाएगा ताकि रुकी हुई ई-केवायसी प्रक्रिया पूरी हो सके। प्रशासन ने महिलाओं से थोड़ा धैर्य रखने की अपील की है और कहा है कि सिस्टम सुधरते ही प्राथमिकता के आधार पर वेरिफिकेशन किया जाएगा।
फिलहाल, जिले की लाखों महिलाएं पोर्टल के दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रही हैं। महतारी वंदन योजना, जिसे शुरू हुए अब 2 साल पूरे हो चुके हैं, छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। अगर जल्द ही सर्वर की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो आगामी किस्तों के भुगतान में भी देरी होने की संभावना बनी रहेगी, जो राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

