चीन द्वारा शिनजियांग प्रांत में सेनलिंग (Senling) नामक नई काउंटी का गठन करना एशियाई भू-राजनीति में एक बड़ी हलचल के रूप में देखा जा रहा है। यह नया जिला न केवल भौगोलिक रूप से दुर्गम काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित है, बल्कि इसकी सीमाएं पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान के सामरिक वाखान कॉरिडोर से सटी हुई हैं। चीन के इस कदम को उसकी सीमा सुरक्षा को अभेद्य बनाने और विवादित क्षेत्रों पर अपनी प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है।
चीन का प्राथमिक तर्क यह है कि इस नई प्रशासनिक इकाई के माध्यम से वह उइगर अलगाववादी समूहों, विशेष रूप से ‘ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट’ (ETIM) की घुसपैठ को रोकना चाहता है। अफगानिस्तान का वाखान कॉरिडोर एक संकरी पट्टी है जो सीधे शिनजियांग से जुड़ती है, और चीन को लंबे समय से डर रहा है कि उग्रवादी इसी रास्ते का उपयोग कर सकते हैं। सेनलिंग काउंटी के जरिए बीजिंग इस सुदूर इलाके में अपनी सैन्य उपस्थिति और निगरानी तंत्र को और अधिक व्यवस्थित करने की योजना बना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल आतंकवाद विरोधी नहीं है, बल्कि भारत के खिलाफ चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ रणनीति का हिस्सा है। पिछले एक साल के भीतर शिनजियांग में चीन द्वारा बनाई गई यह तीसरी काउंटी है। इससे पहले उसने ‘हीन’ और ‘हेकांग’ काउंटियों का गठन किया था, जिनमें से हीन काउंटी में अक्साई चिन का एक बड़ा हिस्सा शामिल है। भारत इन क्षेत्रों को अपना अभिन्न अंग मानता है, जिस पर चीन ने 1962 के युद्ध के बाद से अवैध कब्जा कर रखा है।
सेनलिंग काउंटी को ऐतिहासिक शहर काशगर के प्रशासनिक नियंत्रण में रखा गया है। काशगर न केवल प्राचीन सिल्क रोड का मुख्य केंद्र है, बल्कि यह अरब डॉलर की लागत वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का शुरुआती बिंदु भी है। चूंकि CPEC का रास्ता PoK से होकर गुजरता है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी नए प्रशासनिक ढांचे का निर्माण भारत की संप्रभुता के लिए एक सीधी चुनौती माना जाता है। चीन इस क्षेत्र में अपनी ढांचागत पकड़ मजबूत कर CPEC की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना चाहता है।
भारत सरकार ने इस घटनाक्रम पर बेहद सख्त और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों को मनगढ़ंत नाम देना या वहां नई प्रशासनिक इकाइयां बनाना जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकता। भारत ने साफ किया है कि इस तरह के “शरारती प्रयासों” का कोई कानूनी या ऐतिहासिक आधार नहीं है और अक्साई चिन व अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्र हमेशा भारत का हिस्सा रहेंगे।
कूटनीतिक स्तर पर, भारत ने चेतावनी दी है कि चीन की ऐसी गतिविधियां द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पहले से ही जारी तनाव के बीच, बीजिंग द्वारा विवादित सीमा के पास नए जिलों का निर्माण आपसी विश्वास और समझ को कमजोर करता है। भारत का रुख स्पष्ट है कि जब तक सीमा पर शांति और यथास्थिति बहाल नहीं होती, तब तक संबंधों में सुधार की उम्मीद करना कठिन है।
कुल मिलाकर, सेनलिंग काउंटी का निर्माण चीन की उस क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा को दर्शाता है जिसमें वह नक्शों और प्रशासनिक घोषणाओं के जरिए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पुनर्व्याख्यायित करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले समय में, यह मुद्दा भारत-चीन सीमा विवाद में एक नया तनाव बिंदु बन सकता है, क्योंकि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता के साथ किसी भी प्रकार के समझौते को स्वीकार नहीं करेगा।

