पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आज अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति वार्ता होने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। इस बैठक के लिए इस्लामाबाद को एक अभूतपूर्व सुरक्षा छावनी में बदल दिया गया है, जहां चप्पे-चप्पे पर कमांडो तैनात हैं। अमेरिकी दल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबफ मोर्चा संभाल रहे हैं। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जारी तनाव को कम कर एक स्थायी युद्धविराम पर सहमति बनाना है।
इस कूटनीतिक हलचल के बीच, अंतरराष्ट्रीय राजनीति के दिग्गज और शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन मियरशाइमर ने एक बेहद डरावनी चेतावनी दी है। वॉशिंगटन में अरब सेंटर के एक सम्मेलन में बोलते हुए मियरशाइमर ने कहा कि इजरायल अंततः ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग कर सकता है। उनके अनुसार, इजरायल ईरान को अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है और चूंकि अब तक के पारंपरिक सैन्य प्रयास पूरी तरह सफल नहीं रहे हैं, इसलिए इजरायल इस चरम विकल्प की ओर बढ़ सकता है।
मियरशाइमर, जिन्हें ‘ऑफेंसिव रियलिज्म’ के सिद्धांत का जनक माना जाता है, ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी राजनीति में इजरायल समर्थक लॉबी इतनी प्रभावशाली है कि वॉशिंगटन शायद इजरायल को इस घातक कदम से रोकने की स्थिति में न हो। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के साथ जारी यह संघर्ष अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका साबित हो सकता है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में हर देश अपने वर्चस्व के लिए लड़ता है और इस क्षेत्र में तनाव का मौजूदा स्तर किसी बड़े विनाश की ओर इशारा कर रहा है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता की मेज पर बैठने से पहले ही अपने तेवर सख्त कर लिए हैं। ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी देते हुए कहा कि वह ‘सिर्फ बातचीत के ही लिए जिंदा है’, जिसका सीधा अर्थ यह है कि अमेरिका ईरान पर अधिकतम दबाव बनाए रखना चाहता है। ट्रंप का यह रुख यह दर्शाता है कि अमेरिका समझौते के लिए तो तैयार है, लेकिन वह अपनी शर्तों और ताकत की स्थिति से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
रणनीतिक मोर्चे पर ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है और वार्ता से ठीक पहले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से बंद कर दिया है। मियरशाइमर ने इसे इस संघर्ष का सबसे बड़ा मोड़ बताया है, क्योंकि इस जलमार्ग पर ईरान का नियंत्रण वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को हिलाने की क्षमता रखता है। ईरान का यह कदम शांति वार्ता में अपनी स्थिति को मजबूत करने और अमेरिका पर दबाव डालने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, आज की यह बैठक एक चौराहे पर खड़ी है—एक तरफ शांति की उम्मीद है और दूसरी तरफ परमाणु युद्ध की आशंका वाली प्रोफेसर जॉन की चेतावनी। यदि इस्लामाबाद में जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत विफल होती है, तो मध्य पूर्व का संकट एक ऐसे भयावह दौर में प्रवेश कर सकता है जिसकी कल्पना मात्र से दुनिया सहमी हुई है। वैश्विक समुदाय की प्रार्थना यही है कि कूटनीति सफल हो और मियरशाइमर की परमाणु भविष्यवाणी केवल एक सैद्धांतिक चेतावनी ही बनी रहे।

