छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की आस लगाए बैठे हजारों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के विरोध और संभावित बहिष्कार की धमकियों के बीच, राज्य के शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रवेश प्रक्रिया अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही चलेगी। विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार के दबाव में आकर गरीब बच्चों के भविष्य के साथ समझौता नहीं किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से संपन्न किया जाएगा।
आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में अब तक कुल 38,439 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रशासनिक तत्परता दिखाते हुए इनमें से 34,004 आवेदनों की जांच और सत्यापन का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। वर्तमान में केवल 4,435 आवेदन शेष हैं, जिनके त्वरित निराकरण के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग की प्राथमिकता यह है कि लॉटरी से पहले सभी पात्र आवेदकों का डेटा पूरी तरह तैयार रहे ताकि किसी भी तकनीकी खामी की गुंजाइश न रहे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया यानी लॉटरी और सीट आबंटन 13 अप्रैल से 17 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित की जाएगी। इसके बाद जिन छात्रों को सीटें आवंटित होंगी, उन्हें 1 मई से 30 मई के बीच संबंधित स्कूलों में अपना दाखिला सुनिश्चित करना होगा। साथ ही, स्कूलों के लिए वर्ष 2025-26 की शुल्क प्रतिपूर्ति के सत्यापन का कार्य 25 मई से शुरू होकर 25 जून तक चलेगा, जिससे वित्तीय पारदर्शिता बनी रहे।
जो छात्र पहले चरण में आवेदन नहीं कर पाए या जिन्हें सीट नहीं मिल सकी, उनके लिए दूसरे चरण की प्रक्रिया जून माह से शुरू होगी। नए स्कूलों का पंजीयन 8 जून से 20 जून तक किया जाएगा और छात्रों के लिए आवेदन का पोर्टल 1 जुलाई से 11 जुलाई 2026 तक दोबारा खुलेगा। दूसरे चरण की लॉटरी 27 जुलाई से 31 जुलाई के बीच निकाली जाएगी, जिसके बाद 17 अगस्त तक प्रवेश की अंतिम प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी।
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि इस पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। संचालनालय ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्तर पर निजी स्कूलों या बिचौलियों द्वारा किसी अनियमितता या लापरवाही की सूचना मिलती है, तो संबंधितों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। शासन का लक्ष्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराना है।

