अहमदाबाद: पिछले साल जून में अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के विमान AI 171 के घाव एक बार फिर हरे हो गए हैं। इस भीषण त्रासदी के 10 महीने बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें अब तक दुर्घटना के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है। अपनी पीड़ा और अनसुलझे सवालों को लेकर गुजरात के करीब 30 प्रभावित परिवारों ने शनिवार को अहमदाबाद में एक बैठक की और सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
परिजनों द्वारा लिखे गए इस पत्र में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि दुर्घटना की जांच से जुड़े ‘कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर’ (CVR) और ‘ब्लैक बॉक्स’ (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) की जानकारी को सार्वजनिक किया जाए। परिवारों का मानना है कि केवल तकनीकी डेटा ही यह स्पष्ट कर सकता है कि उस दिन विमान के साथ असल में क्या हुआ था। उन्होंने पत्र की प्रतियां नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को भी भेजी हैं, ताकि जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
यह दुखद घटना 12 जून को घटित हुई थी, जब बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान लंदन के लिए रवाना हुआ था। उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद विमान तकनीकी खराबी या अन्य अज्ञात कारणों से एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर से टकरा गया और उसमें भीषण आग लग गई। इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि जमीन पर मौजूद 19 अन्य लोगों ने भी अपनी जान गंवाई थी। कुल 260 मौतों के साथ यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी विमान त्रासदियों में से एक बन गई।
परिवारों का मुख्य तर्क यह है कि यदि सुरक्षा कारणों से ब्लैक बॉक्स का डेटा पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम इसे पीड़ित परिवारों के साथ बंद कमरे में साझा किया जाना चाहिए। हादसे में अपने जवान बेटे को खोने वाले निलेश पुरोहित ने भर्राई आवाज में कहा कि मुआवजा उनके जीवन के खालीपन को नहीं भर सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी आर्थिक सहायता के लिए नहीं, बल्कि केवल ‘सच्चाई’ जानने के लिए लड़ रहे हैं ताकि उन्हें मानसिक शांति मिल सके।
शिकायतों का अंबार केवल जांच तक ही सीमित नहीं है; एयर इंडिया द्वारा सहायता के लिए बनाई गई व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वसाद की किंजल पटेल, जिन्होंने अपनी मां को खोया था, ने बताया कि एयरलाइन की वेबसाइट पर सामान पहचानने की प्रक्रिया बेहद जटिल है। वेबसाइट पर 25 हजार से अधिक वस्तुओं की तस्वीरें अपलोड की गई हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता इतनी खराब है कि अपनों की पहचान कर पाना लगभग असंभव है। इससे परिवारों का मानसिक तनाव और बढ़ गया है।
इसके अलावा, संचार की कमी भी परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। रोमिन वोरा, जिन्होंने इस हादसे में अपने परिवार के तीन सदस्यों को खोया, ने आरोप लगाया कि एयरलाइन की ओर से केवल एक ईमेल आईडी दी गई है। उन्होंने कहा कि गांव में रहने वाले लोग, जो तकनीक से वाकिफ नहीं हैं, वे संपर्क करने में असमर्थ हैं। जो लोग ईमेल करते भी हैं, उन्हें जवाब मिलने में हफ्तों लग जाते हैं, जिससे यह महसूस होता है कि प्रशासन उनकी पीड़ा के प्रति संवेदनशील नहीं है।
जांच के मोर्चे पर, एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने पिछले साल जुलाई में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। उस रिपोर्ट में शुरुआती तौर पर ‘पायलट की चूक’ (Pilot Error) की ओर इशारा किया गया था। हालांकि, पीड़ित परिवारों ने इस दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है और वे पूर्ण तकनीकी विश्लेषण की मांग कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि क्या विमान के इंजन या नेविगेशन सिस्टम में भी कोई खराबी थी।
हादसे की पहली बरसी अब करीब है और उम्मीद जताई जा रही है कि जून तक अंतिम विस्तृत रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी। प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र के माध्यम से परिवारों को उम्मीद है कि सरकार इस मामले में तेजी लाएगी और उन्हें वह जवाब मिलेगा जिसका वे पिछले 10 महीनों से इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल, इन परिवारों के लिए न्याय की लड़ाई और दुख का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

