जशपुर। छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ समृद्ध पुरातात्विक विरासत के लिए भी विश्व पटल पर पहचान बना रहा है। जिले के मनोरा विकासखंड स्थित ग्राम जयमरगा के ‘गढ़पहाड़’ की गुफाओं में आदिमकालीन शैलचित्र मिले हैं, जो प्रागैतिहासिक मानव जीवन के अनछुए पहलुओं को उजागर करते हैं। लगभग 300 मीटर ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह गुफा न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि घने जंगलों के बीच स्थित होने के कारण पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनती जा रही है।
पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की और श्री बालेश्वर कुमार बेसरा के शोध के अनुसार, यह क्षेत्र मध्य पाषाण काल में आदिमानवों का प्रमुख निवास स्थान रहा होगा। यहाँ पहाड़, जल स्रोत और सघन वन की उपलब्धता ने प्राचीन मानवों को भोजन और सुरक्षा प्रदान की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गुफा का उपयोग संभवतः शिकार के दौरान वन्यजीवों पर नजर रखने के लिए एक ‘वॉच-टॉवर’ या पहरेदारी स्थल के रूप में किया जाता था। यहाँ मिले साक्ष्य बताते हैं कि हज़ारों साल पहले भी मानव समाज यहाँ फल-फूल रहा था।

गुफा की दीवारों पर लाल और सफेद रंगों से उकेरे गए शैलचित्रों में बैल, तेंदुआ और हिरण जैसे पशुओं के साथ-साथ मानवीय आकृतियाँ भी अंकित हैं। इन चित्रों में ज्यामितीय और कुछ रहस्यमयी आकृतियाँ भी दिखाई देती हैं, जो उस समय की कलात्मक समझ और सामाजिक ताने-बाने को दर्शाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहाँ ‘हेमाटाइट’ पत्थर भी पाया गया है, जिसे घिसकर उस काल के कलाकार रंग तैयार करते थे। ये चित्र आज भी स्पष्ट दिखाई देते हैं और प्राचीन कला के बेजोड़ नमूने हैं।
खुदाई और सर्वेक्षण के दौरान यहाँ से कई सूक्ष्म पाषाण उपकरण (माइक्रोलिथिक टूल्स) भी प्राप्त हुए हैं। इनमें लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट और ब्लेड जैसे औजार शामिल हैं, जिनका उपयोग आदिमानव शिकार और दैनिक कार्यों के लिए करते थे। इन उपकरणों की मौजूदगी इस बात की पुष्टि करती है कि जयमरगा क्षेत्र प्रागैतिहासिक काल की एक उन्नत सभ्यता का हिस्सा था। स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह स्थल आज भी बड़ी आस्था का केंद्र है, जहाँ वे विशेष अवसरों पर पूजा-अर्चना करते हैं।
जशपुर की यह अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर अब संरक्षण की दरकार रखती है। विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि यदि इस स्थल को उचित तरीके से संरक्षित और विकसित किया जाए, तो यह न केवल शोधकर्ताओं के लिए ज्ञान का भंडार साबित होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर जशपुर को एक नई पहचान भी दिलाएगा। आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक साक्ष्य को बचाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

