मालदा: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए जारी धुआंधार प्रचार के बीच मालदा के मालतीपुर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हेलिकॉप्टर के बेहद करीब एक संदिग्ध ड्रोन उड़ता हुआ दिखाई दिया। यह घटना तब हुई जब तृणमूल सुप्रीमो अपनी जनसभा समाप्त कर हेलिपैड की ओर बढ़ रही थीं। वीवीआईपी सुरक्षा घेरे के इतने करीब ड्रोन को मंडराते देख मुख्यमंत्री ने मौके पर ही गहरी नाराजगी जताई और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
संसी कॉलेज मैदान में आयोजित इस चुनावी रैली में मुख्यमंत्री ने करीब 34 मिनट तक जनता को संबोधित किया। जैसे ही वह अपनी अगली मंजिल पर जाने के लिए हेलिकॉप्टर के पास पहुंचीं, उनकी नजर ऊपर मंडराते ड्रोन पर पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ड्रोन की हरकतें संदिग्ध लग रही थीं, जिसे देखते ही ममता बनर्जी ‘गुस्से से लाल’ हो गईं। उन्होंने तुरंत हाथ में माइक लिया और तैनात पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाते हुए पूछा कि बिना अनुमति के ड्रोन को वहां उड़ने की इजाजत कैसे दी गई।
मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। ममता बनर्जी ने तुरंत अपनी निजी सुरक्षा टीम और पुलिस को ड्रोन के स्रोत की जांच करने और इसे उड़ाने वाले व्यक्ति की पहचान करने के सख्त निर्देश दिए। कुछ देर के लिए पूरा इलाका तनावपूर्ण हो गया और सुरक्षा घेरे को और कड़ा कर दिया गया। पार्टी सूत्रों का कहना था कि शुरुआत में ड्रोन की गतिविधियां काफी रहस्यमयी लग रही थीं, जिससे किसी बड़ी साजिश की आशंका पैदा हो गई थी।
हालांकि, गहन जांच के बाद पुलिस और पार्टी पदाधिकारियों ने राहत की सांस ली। यह पता चला कि वह ड्रोन किसी बाहरी तत्व का नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के प्रचार का जिम्मा संभालने वाली एक एजेंसी का ही था। एजेंसी के लोग चुनावी रैली की फुटेज रिकॉर्ड करने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे थे। स्पष्टीकरण मिलने के बाद ड्रोन को तुरंत नीचे उतारा गया। इस घटना ने चुनावी रैलियों में तकनीक के इस्तेमाल और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच तालमेल की कमी को उजागर कर दिया है।

