ईरान और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की आशंकाओं के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। एलपीजी से लदा भारतीय टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ सफलतापूर्वक दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुका है। लगभग 46,655 मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर आ रहा यह जहाज अब सुरक्षित क्षेत्र में है और इसके 6 अप्रैल 2026 तक मुंबई बंदरगाह पहुंचने की पूरी संभावना है।
युद्ध के हालातों के कारण इस टैंकर की यात्रा बेहद जोखिम भरी थी। शुक्रवार रात जब इस जहाज ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया, तब भारतीय नौसेना और जहाजरानी महानिदेशालय (DG Shipping) इसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए थे। ‘ग्रीन सान्वी’ उन चुनिंदा टैंकरों में से एक है जिन्हें नौसेना के सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जिससे देश में एलपीजी की तत्काल किल्लत का खतरा टल गया है।
भारत अपनी रसोई गैस की कुल खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता है। ईरान और पड़ोस में चल रहे संघर्ष की वजह से आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है। ‘ग्रीन सान्वी’ का सुरक्षित मुंबई पहुंचना इस बात का संकेत है कि भारत सरकार और नौसेना मिलकर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
हालांकि, राहत के बीच चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वर्तमान रिपोर्टों के अनुसार, अभी भी 17 भारतीय जहाज होर्मुज के पश्चिम में फंसे हुए हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इनमें ‘ग्रीन आशा’ और ‘जग विक्रम’ जैसे महत्वपूर्ण एलपीजी टैंकर भी शामिल हैं। सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए पहले ही आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया है और आने वाले दिनों में इन फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकालना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

