पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उपजा विवाद अब एक गंभीर संकट में तब्दील हो गया है। मालदा जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहा है, जहाँ मुस्लिम समुदाय के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान जानबूझकर उनके समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिसके कारण पूरे जिले में तनाव व्याप्त है।
इस विरोध प्रदर्शन ने उस समय हिंसक और संवैधानिक संकट का रूप ले लिया जब प्रदर्शनकारियों ने मालदा और कालियाचक के सात न्यायिक अधिकारियों (जजों) का घेराव कर उन्हें बंधक बना लिया। इन अधिकारियों में चार महिला न्यायाधीश भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये अधिकारी बुधवार शाम से ही प्रदर्शनकारियों के बीच फंसे हुए हैं और मानिकचक इलाके में चक्का जाम के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट को तुरंत सूचित किया गया है और चुनाव आयोग से भी संपर्क साधा गया है। स्थानीय प्रशासन पर यह आरोप लग रहे हैं कि सूचना मिलने के बावजूद घंटों तक अधिकारियों को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। हालांकि, मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और मालदा के पुलिस अधीक्षक अनुपम सिंह का कहना है कि प्रशासन बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।
विवाद की जड़ में चुनाव आयोग द्वारा जारी की जा रही सप्लीमेंट्री लिस्ट है। सूत्रों के मुताबिक, पूरे बंगाल में करीब 22 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। मालदा में प्रदर्शनकारियों का दावा है कि न्यायाधीशों ने SIR प्रक्रिया के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो गए हैं। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि उनके नाम तुरंत सूची में वापस जोड़े जाएं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों की भी अवहेलना होती दिख रही है, जिसमें SIR कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों को विशेष सुरक्षा प्रदान करने की बात कही गई थी। कोर्ट के आदेश के बावजूद जजों का इस तरह घेराव होना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। इधर, चुनाव आयोग ने इस पूरी घटना पर राज्य के पुलिस महानिदेशक (DG) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है ताकि दोषियों पर कार्रवाई की जा सके।
फिलहाल, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह भीड़ को हटाने के लिए तत्काल केंद्रीय बलों के इस्तेमाल के पक्ष में नहीं है। आयोग और स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर रास्ता साफ कराने और बंधक बनाए गए न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकालने की है। इलाके में माहौल अभी भी बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है और राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

