रायपुर: छत्तीसगढ़ की धरती पर आयोजित ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026’ आदिवासी समाज के सुनहरे भविष्य की नई इबारत लिख रहा है। बुधवार को रायपुर पहुंचीं केंद्रीय खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने आयोजन का जायजा लिया और खिलाड़ियों के जोश को ‘बदलाव की नई लहर’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आदिवासी युवाओं के सपनों को उड़ान देने वाला एक सशक्त माध्यम बन गया है, जहाँ उनकी मेहनत और कौशल को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
श्रीमती खडसे ने राज्य के बदलते परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़, जो कभी नक्सली हिंसा के साये में रहता था, अब विकास और शांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की नक्सलवाद मुक्त भारत की घोषणा को याद करते हुए कहा कि अब बंदूकों की जगह युवाओं के हाथों में खेल के उपकरण हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य इन दूरदराज के क्षेत्रों के युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देना है, ताकि वे कल के ओलंपिक विजेता बन सकें।

इस आयोजन की एक बड़ी उपलब्धि ‘अस्मिता लीग’ का सफल क्रियान्वयन रही है। खेल राज्य मंत्री ने आंकड़ों के साथ बताया कि ग्रामीण महिलाओं को समर्पित इस लीग ने महिला खिलाड़ियों की एक नई पीढ़ी तैयार की है। वर्तमान खेलों में भाग ले रही 70 प्रतिशत महिला खिलाड़ी इसी लीग की देन हैं। विशेष रूप से तैराकी के क्षेत्र में महिलाओं का दबदबा रहा, जहाँ सभी पांच शीर्ष पदक उन बेटियों ने जीते जो ‘अस्मिता लीग’ के प्रशिक्षण से निखर कर सामने आई हैं।
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के योगदान को सराहते हुए कहा कि आज आदिवासी युवाओं की काबिलियत को पहचाना जा रहा है और उन पर निवेश किया जा रहा है। उन्होंने वादा किया कि सरकार आने वाले समय में इन खेलों और लीगों को और भी छोटे गांवों तक ले जाएगी। अंजली मुंडा जैसी खिलाड़ियों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मंच मिले, तो भारत के ग्रामीण अंचलों की प्रतिभा पूरी दुनिया में चमकने का दम रखती है।

