देश के वित्तीय इतिहास में आज, 1 अप्रैल 2026, का दिन एक बड़े बदलाव के रूप में दर्ज हो गया है। केंद्र सरकार ने 64 साल पुराने ‘आयकर अधिनियम 1961’ को पूरी तरह से समाप्त कर नया ‘आयकर अधिनियम 2025’ लागू कर दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रणाली की जटिलताओं को खत्म करना और करदाताओं के लिए नियमों को सरल बनाना है। नए कानून के तहत अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ जैसे भ्रमित करने वाले शब्दों को हटाकर केवल एक ‘टैक्स ईयर’ (Tax Year) की व्यवस्था अपनाई गई है।
नौकरीपेशा वर्ग के लिए इस बार कई राहतें दी गई हैं। खान-पान के खर्चों को देखते हुए फूड कार्ड पर टैक्स फ्री लिमिट को 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दिया गया है। इसके अलावा, कंपनियों से मिलने वाले गिफ्ट और वाउचर की सालाना छूट सीमा को भी 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया है। बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल अलाउंस में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जिससे मध्यम वर्ग की बचत में इजाफा होगा। हालांकि, HRA क्लेम करने वालों के लिए नियम सख्त कर दिए गए हैं; अब मकान मालिक का PAN और वैध किराया प्रमाण देना अनिवार्य होगा।
शेयर बाजार के निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए यह बदलाव मिला-जुला असर लेकर आया है। जहां एक तरफ फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करना महंगा हो गया है क्योंकि सरकार ने STT (Securities Transaction Tax) में वृद्धि कर दी है, वहीं दूसरी तरफ शेयर बायबैक के नियमों को भी बदल दिया गया है। अब कंपनियों द्वारा शेयरों की वापस खरीद (Buyback) पर होने वाली आय को ‘कैपिटल गेन’ की श्रेणी में रखकर टैक्स वसूला जाएगा, जो निवेशकों की जेब पर सीधा असर डाल सकता है।
टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए ITR की समयसीमा में भी संशोधन किया गया है। अब व्यक्तिगत करदाताओं (ITR-1 और ITR-2) के लिए 31 जुलाई की तारीख बरकरार रहेगी, लेकिन ऑडिट की जरूरत वाले और प्रोफेशनल करदाताओं (ITR-3 और ITR-4) के लिए आखिरी तारीख को बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है। इसके अलावा, अब आयकर के सभी पुराने फॉर्म्स के नाम बदल दिए गए हैं, हालांकि उनके बुनियादी कार्यों को सरल रखा गया है ताकि फाइलिंग के समय तकनीकी दिक्कतें कम हों।
अंत में, सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए PAN कार्ड से जुड़े नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है। अब बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए पैन (PAN) देना न सिर्फ अनिवार्य है, बल्कि इसकी सत्यापन प्रक्रिया को भी मजबूत किया गया है। आधार के जरिए तुरंत पैन प्राप्त करने की पुरानी सुविधा में भी बदलाव किए गए हैं ताकि पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह नया कानून न केवल डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देगा, बल्कि टैक्स चोरी रोकने में भी मील का पत्थर साबित होगा।

