धरसीवां। रायपुर जिले के धरसीवां विधानसभा क्षेत्र के औद्योगिक इलाकों में प्रदूषण का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को सांकरा और सोंडरा स्थित इस्पात संयंत्रों की चिमनियों से भारी मात्रा में निकलता काला धुआं एक बार फिर पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाता नजर आया। हाल ही में पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा कुछ इकाइयों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई के बावजूद, जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे उद्योगों की मनमानी और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक इकाइयां चालाकी से प्रदूषण फैला रही हैं। दिन के समय रुक-रुककर धुआं छोड़ा जाता है, ताकि किसी की नजर न पड़े, लेकिन रात के अंधेरे में धुआं छोड़ने की रफ्तार और मात्रा कई गुना बढ़ा दी जाती है। इस जहरीले धुएं के कारण आसपास के गांवों में प्रदूषण की एक स्थायी काली छाया पसर गई है। घरों के आंगन से लेकर छतों तक राख की परतें जमी देखी जा सकती हैं, जो सीधे तौर पर लोगों के श्वसन तंत्र पर हमला कर रही हैं।

प्रदूषण का सबसे भयावह असर स्थानीय जल स्रोतों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि सोंडरा और सांकरा के तालाबों के पानी पर प्रदूषण की एक गाढ़ी काली परत जम गई है। यह वही पानी है जिसका उपयोग निस्तारी और मवेशियों के पीने के लिए किया जाता है। प्रदूषित जल के कारण न केवल मवेशी बीमार पड़ रहे हैं, बल्कि भविष्य में भूजल के भी जहरीले होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति निर्मित हो रही है।
स्थानीय ग्रामीण नेमीचंद निषाद ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि अखबारों के माध्यम से कार्रवाई की खबरें तो पढ़ने को मिलती हैं, लेकिन हकीकत में फैक्ट्रियों के रवैये में कोई सुधार नहीं आया है। उन्होंने लाचारी जताते हुए कहा कि उद्योगों का होना रोजगार के लिए जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ग्रामीणों का जीना ही मुहाल कर दिया जाए। प्रदूषण की बढ़ती मात्रा ने बुजुर्गों और बच्चों के लिए सांस लेना भी दूभर कर दिया है।
अब देखना यह होगा कि पर्यावरण विभाग इस नई शिकायतों और कैमरों में कैद हुए साक्ष्यों के बाद क्या कड़ा रुख अपनाता है। क्या दोषी फैक्ट्रियों पर केवल कागजी जुर्माना लगाया जाएगा या उनके संचालन को तब तक रोका जाएगा जब तक वे मानक मानदंडों का पालन सुनिश्चित नहीं करते। धरसीवां की जनता अब खोखले आश्वासनों के बजाय स्वच्छ हवा और साफ पानी के लिए ठोस कार्रवाई की मांग कर रही है।

