रायपुर, 30 मार्च 2026: साल 2021 में विश्व कैडेट और जूनियर दोनों खिताब जीतकर दीपिका कुमारी की बराबरी करने वाली जमशेदपुर की कोमालिका बारी एक बार फिर चर्चा में हैं। जूनियर स्तर पर अपनी धाक जमाने के बाद, अब वह सीनियर सर्किट में अपनी जगह पक्की करने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही हैं। फिलहाल वह भारतीय तीरंदाजी टीम के चयन के अंतिम दौर में पहुँच चुकी हैं।
अपनी तकनीक और प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए कोमालिका पुणे में आयोजित विशेष प्रशिक्षण शिविर में पसीना बहा रही हैं। वह वर्तमान में टॉप-16 खिलाड़ियों में शामिल हैं और राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा हैं। उनका पूरा ध्यान 2026 एशियाई खेलों के लिए टीम में जगह बनाने पर है, जिसके लिए वह अपनी मानसिक मजबूती और दबाव में खेलने की क्षमता पर काम कर रही हैं।
कोमालिका का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। महज 12 साल की उम्र में धनुष उठाने वाली इस खिलाड़ी के पास शुरुआत में अभ्यास के लिए पैसे नहीं थे। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने शुरुआती ट्रेनिंग बांस से बने अस्थायी धनुष से की। उनकी माँ, जो एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया और स्थानीय कोच के पास ले गईं।
जमशेदपुर स्थित प्रतिष्ठित टाटा आर्चरी अकादमी तक पहुँचने के लिए कोमालिका को कड़ा संघर्ष करना पड़ा। अकादमी में अभ्यास करने के लिए वह रोजाना अपने घर से 18 किलोमीटर साइकिल चलाकर जाती थीं। कोच धर्मेंद्र तिवारी और पूर्णिमा महतो के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी कला को निखारा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया।
वर्तमान में कोमालिका रायपुर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं। यहाँ वह व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित स्पर्धाओं में हिस्सा ले रही हैं। उनका मानना है कि यह मंच जनजातीय बच्चों को खेलों को करियर के रूप में चुनने के लिए प्रेरित करेगा और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करेगा।
कोमालिका का अंतिम लक्ष्य 2028 ओलंपिक में पदक जीतना है। उनका कहना है कि खेल में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। वह न केवल खुद जीतना चाहती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक रोल मॉडल भी बनना चाहती हैं।

