ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच, वाशिंगटन ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य पकड़ को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अमेरिकी वायु सेना ने उत्तरी जापान में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मिसावा एयर बेस (Misawa Air Base) पर अपने पांचवीं पीढ़ी के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान F-35A लाइटनिग II की स्थायी तैनाती शुरू कर दी है। यह कदम सीधे तौर पर चीन, रूस और उत्तर कोरिया की सीमाओं के पास अमेरिकी वायु शक्ति को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सैन्य विशेषज्ञों और ‘मिलिट्री वॉच मैग्जीन’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह तैनाती एक बड़े बेड़े के आधुनिकीकरण का हिस्सा है। अमेरिका यहाँ पहले से तैनात चौथी पीढ़ी के 36 पुराने F-16CJ लड़ाकू विमानों को हटाकर उनकी जगह 48 नए F-35A विमानों को तैनात कर रहा है। विमानों की संख्या में यह वृद्धि और तकनीक में पीढ़ीगत बदलाव यह दर्शाता है कि अमेरिका अब पूर्वी एशिया में अपनी ‘कॉम्बैट पावर’ यानी युद्धक क्षमता को स्थायी रूप से बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि किसी भी आकस्मिक चुनौती का तुरंत जवाब दिया जा सके।
मिसावा एयर बेस पर तैनात 13वीं फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल जॉन विडमर ने इस बदलाव को क्रांतिकारी बताया है। उनके अनुसार, F-16 की तुलना में F-35A की सबसे बड़ी ताकत उसकी ‘स्टील्थ’ (Stealth) क्षमता है, जो इसे दुश्मन के रडार की नजरों से ओझल रखती है। विडमर ने स्पष्ट किया कि F-35A के उन्नत सेंसर पैकेज और ‘सेंसर फ्यूजन’ तकनीक की मदद से वे दुश्मन के किसी भी खतरे का समय रहते पता लगा सकते हैं और उसे प्रभावी ढंग से बेअसर (Manage) कर सकते हैं, जो युद्ध की स्थिति में एक निर्णायक बढ़त दिलाता है।
इस तैनाती का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू ‘वाइल्ड वीसल’ (Wild Weasel) मिशन है। ऐतिहासिक रूप से, मिसावा एयर बेस का उपयोग दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे रडार और मिसाइल बैटरी) को नष्ट करने के लिए किया जाता रहा है। पुराने विमानों को इस काम के लिए विशेष रूप से मॉडिफाई करना पड़ता था, लेकिन F-35A को डिजाइन ही इस ‘सप्रेशन ऑफ एनिमी एयर डिफेंस’ मिशन के लिए किया गया है। इसमें लगी ‘क्वार्टरबैक’ क्षमता इसे न केवल हमलावर बनाती है, बल्कि युद्धक्षेत्र में अन्य विमानों के लिए एक दिशा-निर्देशक (Coordinator) के रूप में भी कार्य करने देती है।
रणनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका की यह ‘बड़ी चाल’ पूर्वी एशिया के शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकती है। जापान का मिसावा एयर बेस भौगोलिक रूप से रूस के सुदूर पूर्वी हिस्से, उत्तर कोरिया और चीन के करीब है। यहाँ पांचवीं पीढ़ी के विमानों की स्थायी उपस्थिति का मतलब है कि अमेरिका अब इन देशों की सैन्य गतिविधियों पर न केवल कड़ी नजर रख सकेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनकी रक्षा पंक्तियों को भेदने में भी सक्षम होगा। जुलाई 2024 में घोषित इस योजना का क्रियान्वयन अब जमीन पर दिखने लगा है।
अंततः, अमेरिका का यह कदम यह साफ संदेश देता है कि वह मध्य-पूर्व के संकटों में उलझे होने के बावजूद एशिया-प्रशांत क्षेत्र से अपना ध्यान हटने नहीं देना चाहता। 48 फाइटर जेट्स का यह समूह पूर्वी एशिया में अमेरिकी वायु सेना की अब तक की सबसे बड़ी और आधुनिक स्थायी तैनाती का प्रतिनिधित्व करता है। यह न केवल जापान की सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में चीन और उसके सहयोगियों की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाओं के सामने एक मजबूत ‘प्रतिरोध’ पैदा करता है।

