भारत सरकार ने देश के टेलीविज़न ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए TV रेटिंग नीति 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस नई नीति का प्राथमिक उद्देश्य TRP (टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट) प्रणाली में सुधार करना और डेटा की हेरफेर को पूरी तरह से रोकना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापनदाताओं और दर्शकों को सटीक जानकारी मिले, इसके लिए रेटिंग प्रक्रिया को आधुनिक मानकों के अनुरूप बनाया गया है।
इस नीति का सबसे बड़ा प्रहार ‘लैंडिंग पेज’ की रणनीति पर हुआ है। अब तक कई चैनल अपनी रेटिंग बढ़ाने के लिए केबल ऑपरेटर्स के साथ मिलकर लैंडिंग पेज (टीवी चालू करते ही दिखने वाला चैनल) का सहारा लेते थे, जिससे उनकी व्यूअरशिप कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई दिखती थी। नई नीति के तहत अब लैंडिंग पेज की व्यूअरशिप को रेटिंग से बाहर कर दिया गया है। अब चैनलों को केवल उनकी सामग्री (कंटेंट) के आधार पर ही रेटिंग मिलेगी, जिससे असली और विश्वसनीय डेटा सामने आएगा।
रेटिंग एजेंसियों के लिए भी नियमों में बड़ी ढील दी गई है ताकि इस क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ सके। सरकार ने रेटिंग एजेंसियों के लिए न्यूनतम नेट वर्थ की पात्रता को ₹20 करोड़ से घटाकर ₹5 करोड़ कर दिया है। इस कदम से न केवल नई एजेंसियों के प्रवेश का रास्ता खुलेगा, बल्कि वर्तमान में BARC (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) के एकाधिकार को भी चुनौती मिल सकेगी। अधिक एजेंसियां होने से डेटा संग्रह के लिए ‘सैंपल साइज’ भी बढ़ेगा, जिससे छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की पसंद को बेहतर तरीके से मापा जा सकेगा।
सुरक्षा और सटीकता के मोर्चे पर, नई नीति में दोहरी ऑडिट प्रणाली (Double Audit System) को अनिवार्य किया गया है। इसका अर्थ है कि रेटिंग के आंकड़ों की जांच अब दो अलग-अलग स्तरों पर होगी ताकि किसी भी प्रकार की डेटा चोरी या हेरफेर की संभावना न रहे। इसके साथ ही, एजेंसियों को भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, जिससे उन घरों की गोपनीयता सुरक्षित रहेगी जहाँ रेटिंग मापने वाले मीटर लगाए गए हैं।
कुल मिलाकर, 2026 की यह नई नीति भारतीय मीडिया जगत में एक बड़े बदलाव का संकेत है। इससे न केवल दर्शकों को बेहतर कंटेंट मिलने की उम्मीद है, बल्कि विज्ञापनदाताओं को भी अपने निवेश का सही मूल्य मिल सकेगा। पारदर्शी कार्यप्रणाली और सख्त डेटा सुरक्षा के साथ, यह नीति भारतीय टेलीविज़न उद्योग को वैश्विक मानकों के करीब ले जाने का एक ठोस प्रयास है।

