नई दिल्ली। देश की कर प्रणाली में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आगामी 1 अप्रैल 2026 से नया ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ लागू होने वाला है, जो करदाताओं के लिए निवेश और बचत के नए अवसर लेकर आएगा। इस नए कानून के लागू होते ही वेतनभोगी कर्मचारियों और अन्य टैक्सपेयर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह चुनने की होगी कि वे पुरानी टैक्स व्यवस्था के साथ बने रहें या नई कर व्यवस्था को अपनाएं। हालिया संशोधनों ने इन दोनों विकल्पों के बीच के अंतर को और अधिक स्पष्ट कर दिया है, जिससे अब टैक्स प्लानिंग और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
नई टैक्स व्यवस्था को उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो निवेश के दस्तावेजों और जटिल गणनाओं के झंझट से बचना चाहते हैं। इस व्यवस्था के तहत टैक्स की दरें काफी कम रखी गई हैं और ₹12 लाख तक की सालाना आय वाले व्यक्तियों को सेक्शन 87A के तहत पूरी छूट देने का प्रावधान है। हालांकि, इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें एचआरए (HRA), धारा 80C के तहत निवेश और होम लोन के ब्याज जैसी महत्वपूर्ण कटौतियों का लाभ नहीं मिलता। यह सिस्टम उन युवाओं के लिए आदर्श माना जा रहा है जो अभी करियर की शुरुआत कर रहे हैं और जिनका कोई बड़ा निवेश नहीं है।
दूसरी ओर, इनकम टैक्स एक्ट 2025 ने पुरानी टैक्स व्यवस्था को एक नया जीवनदान दिया है। सरकार ने पुरानी व्यवस्था के तहत मिलने वाली कई छूटों की सीमाओं में भारी बढ़ोतरी की है, जिससे यह निवेश करने वाले मध्यम वर्ग के लिए फिर से आकर्षक बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है जो बचत योजनाओं, बीमा और बच्चों की शिक्षा पर खर्च करते हैं। अब पुरानी व्यवस्था केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि स्मार्ट बचत करने वालों के लिए एक शक्तिशाली टूल बनकर उभरी है।
इस नए कानून के तहत सबसे बड़ी राहत हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में दी गई है। अब कई प्रमुख शहरों में HRA की छूट को 40% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है, जो किराए के मकानों में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए सीधा लाभ है। इसके अलावा, दैनिक जरूरतों से जुड़ी छूटों में भी इजाफा किया गया है। मील कूपन की सीमा को ₹50 से बढ़ाकर ₹200 कर दिया गया है और उपहारों पर मिलने वाली सालाना छूट ₹5,000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है, जिससे कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर टैक्स का बोझ कम होगा।
गुरुग्राम के प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट अमित कुमार के अनुसार, ₹20 लाख या उससे अधिक की सालाना आय वाले लोगों के लिए पुरानी व्यवस्था अब कहीं ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति होम लोन के ब्याज, एलआईसी (LIC), पीपीएफ (PPF) और बढ़ी हुई HRA छूट का सही इस्तेमाल करता है, तो वह नई व्यवस्था के मुकाबले सालाना ₹1.25 लाख तक का अतिरिक्त टैक्स बचा सकता है। यह अंतर इतना बड़ा है कि बिना सोचे-समझे किया गया चुनाव आपकी सालाना बचत पर भारी चोट कर सकता है।
शिक्षा और अन्य भत्तों के मामले में भी सरकार ने उदारता दिखाई है। बच्चों की ट्यूशन फीस, हॉस्टल खर्च और अन्य छोटे भत्तों पर मिलने वाली टैक्स फ्री सीमा को भी संशोधित किया गया है। इसका सीधा लाभ उन परिवारों को मिलेगा जो अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बच्चों के भविष्य और शिक्षा पर खर्च करते हैं। पुरानी व्यवस्था के ये नए सुधार यह सुनिश्चित करते हैं कि जो लोग अर्थव्यवस्था में निवेश के माध्यम से योगदान दे रहे हैं, उन्हें टैक्स के मोर्चे पर दंडित न किया जाए।
अंततः, 1 अप्रैल 2026 से पहले हर टैक्सपेयर को अपनी वित्तीय स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करना अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि अपना रिटर्न फाइल करने या निवेश की घोषणा करने से पहले टैक्स कैलकुलेटर का उपयोग जरूर करें और यदि संभव हो तो किसी पेशेवर सलाहकार से राय लें। यदि आपके पास होम लोन या बड़े निवेश नहीं हैं, तो नई व्यवस्था की सरलता आपके काम आएगी, लेकिन यदि आप स्मार्ट वित्तीय योजनाकार हैं, तो पुरानी व्यवस्था के नए नियम आपके बैंक बैलेंस को बढ़ाने में मदद करेंगे।

