रायपुर, 26 मार्च 2026। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता सेखोम मीराबाई चानू ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के उद्घाटन के अवसर पर अपने करियर के सबसे बड़े अधूरे लक्ष्य, एशियन गेम्स पदक को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। 31 वर्षीय मीराबाई ने कहा कि ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में सफलता के बावजूद एशियाई खेलों का पदक अब तक उनसे दूर रहा है। 2014 में नौवें स्थान पर रहने के बाद, 2018 और 2022 के एशियन गेम्स में वे चोटों के कारण अपना सपना पूरा नहीं कर सकी थीं, लेकिन अब नागोया (जापान) में होने वाले आगामी खेलों के लिए वे पूरी तरह केंद्रित हैं।
मीराबाई के लिए आने वाला समय शारीरिक और तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है, क्योंकि उन्हें बहुत कम अंतराल पर दो अलग-अलग भार वर्गों में प्रतिस्पर्धा करनी होगी। वे 23 जुलाई से ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में 48 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लेंगी, जबकि उसके तुरंत बाद 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियन गेम्स के लिए उन्हें फिर से 49 किलोग्राम वर्ग में वजन बढ़ाकर उतरना होगा। नियमों में इस बदलाव और वजन के संतुलन को उन्होंने अपने सफर की एक बड़ी परीक्षा बताया है।
चुनौतियों के बीच मीराबाई वर्तमान में शानदार फॉर्म में नजर आ रही हैं। हाल ही में राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के 48 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने तीन नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। उन्होंने स्नैच में 89 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 116 किलोग्राम के साथ कुल 205 किलोग्राम वजन उठाकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन न केवल उनकी फिटनेस को दर्शाता है, बल्कि एशियन गेम्स में पदक की उनकी उम्मीदों को भी मजबूती देता है।
इस अवसर पर मीराबाई ने छत्तीसगढ़ में आयोजित हो रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच की जरूरत होती है। उन्होंने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE) और साई (SAI) केंद्रों द्वारा खिलाड़ियों को दी जा रही उच्चस्तरीय ट्रेनिंग और पोषण सुविधाओं को भारतीय खेलों के भविष्य के लिए क्रांतिकारी बताया।

