दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) प्रशासन ने कैंपस में विरोध-प्रदर्शनों और सभाओं को लेकर अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है। विश्वविद्यालय ने पहले लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को हटाते हुए अब एक ‘अनुमति-आधारित’ व्यवस्था लागू कर दी है। यह निर्णय दिल्ली उच्च न्यायालय की उन सख्त टिप्पणियों के बाद आया है, जिसमें अदालत ने विरोध पर पूरी तरह रोक लगाने को छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था। अब नई व्यवस्था के तहत कैंपस में किसी भी प्रकार के धरने, रैली या सभा के आयोजन के लिए प्रशासन की मंजूरी अनिवार्य होगी।
नए नियमों के अनुसार, आयोजकों को किसी भी कार्यक्रम से कम से कम 72 घंटे पहले प्रॉक्टर कार्यालय में एक लिखित आवेदन जमा करना होगा। इस आवेदन में आयोजन का स्पष्ट उद्देश्य, समय, स्थान और संभावित प्रतिभागियों की संख्या की जानकारी देना आवश्यक है। साथ ही, आयोजकों को यह आवेदन संबंधित पुलिस अधिकारियों को भी सौंपना होगा। विश्वविद्यालय ने साफ कर दिया है कि केवल सोशल मीडिया पर पोस्टर डालना या जानकारी साझा करना ‘आधिकारिक अनुमति’ नहीं माना जाएगा।
प्रशासन ने सुरक्षा और अनुशासन को लेकर कड़े रुख का संकेत दिया है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, कैंपस के भीतर होने वाले ऐसे आयोजनों में बाहरी व्यक्तियों की भागीदारी पर पूरी तरह से रोक रहेगी। यदि कोई इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें छात्रों का निष्कासन, कर्मचारियों की सेवा समाप्ति और गंभीर स्थितियों में पुलिस की कानूनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब 13 फरवरी को यूजीसी (UGC) के नियमों को लेकर दो छात्र गुटों के बीच भारी हंगामा हुआ था। इसके जवाब में विश्वविद्यालय ने 17 फरवरी को एक महीने के लिए सभी प्रदर्शनों पर रोक लगा दी थी। इसी फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी, जिसके परिणामस्वरूप अब यह नई नियमावली सामने आई है। प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य कैंपस में शैक्षणिक माहौल को बाधित किए बिना लोकतांत्रिक अधिकारों का संतुलन बनाए रखना है।

