हवाई यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। अब फ्लाइट में अपनी पसंद की सीट चुनने के लिए जेब ढीली करने की मजबूरी काफी हद तक खत्म होने वाली है। सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइंस कंपनियों के लिए नए कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिससे यात्रा सस्ती और पारदर्शी होगी।
नए नियमों के मुताबिक, एयरलाइंस कंपनियों को अब हर फ्लाइट की कुल क्षमता में से कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के यात्रियों को उपलब्ध करानी होंगी। इसका मतलब है कि वेब चेक-इन के दौरान अब आपको अधिकांश सीटों के लिए ‘सीट सिलेक्शन फीस’ नहीं देनी पड़ेगी, जो अब तक यात्रियों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ था।
पिछले काफी समय से यह देखा जा रहा था कि एयरलाइंस कंपनियां वेब चेक-इन के दौरान लगभग हर सीट पर चार्ज लगा रही थीं। चाहे वह विंडो सीट हो या गलियारे (Aisle) वाली सीट, यात्रियों को मजबूरी में 200 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक अतिरिक्त देने पड़ते थे। कई बार तो फ्री सीट उपलब्ध ही नहीं होती थी, जिससे यात्रियों में काफी नाराजगी थी।
सरकार का यह कदम हवाई यात्रा को आम आदमी के लिए अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। मंत्रालय का मानना है कि टिकट की कीमत में पारदर्शिता होनी चाहिए और यात्रियों पर छिपे हुए खर्चों का बोझ नहीं डालना चाहिए। इस नियम के लागू होने से यात्रियों को वेब चेक-इन के दौरान अपनी सीट चुनने की अधिक आजादी मिलेगी।
हालांकि, एयरलाइंस अभी भी कुछ विशेष सीटों जैसे कि ज्यादा लेगरूम (Extra Legroom) वाली सीटों या सबसे आगे वाली प्रीमियम सीटों के लिए अतिरिक्त शुल्क ले सकेंगी। लेकिन साधारण सीटों के लिए, जो विमान का बड़ा हिस्सा होती हैं, अब यात्रियों से मनमाना पैसा नहीं वसूला जा सकेगा।

