रूस का विशाल तेल टैंकर ‘आर्कटिक मेटागाज़’ (Arctic Metagaz) पिछले कई दिनों से भूमध्य सागर में इटली और माल्टा के बीच बिना किसी क्रू (चालक दल) के बेकाबू होकर बह रहा है। हाल ही में एक घातक ड्रोन हमले का शिकार होने के बाद जहाज का इंजन और कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह ठप हो गया, जिसके चलते चालक दल को जहाज छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। वर्तमान में यह टैंकर समुद्री लहरों और हवा के बहाव के भरोसे है, जो अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में एक “तैरते हुए टाइम बम” के समान खतरा पैदा कर रहा है।
सबसे बड़ी चिंता भीषण पर्यावरणीय आपदा की है। टैंकर में लाखों बैरल कच्चा तेल मौजूद है; यदि इसकी संरचना हमले की क्षति या समुद्र के दबाव से टूटती है, तो इटली और माल्टा के तटीय इलाकों में दशकों का सबसे बड़ा तेल रिसाव (Oil Spill) हो सकता है। इसके अलावा, दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक होने के कारण, इस ‘घोस्ट शिप’ की अन्य व्यापारिक जहाजों से टक्कर होने की प्रबल आशंका है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार बुरी तरह बाधित हो सकता है।
फिलहाल, यूरोपीय तटरक्षक बल और साल्वेज टीमें स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं, लेकिन रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और युद्ध की स्थिति के कारण बचाव अभियान में तकनीकी और कूटनीतिक बाधाएं आ रही हैं। प्राथमिकता इस बात को दी जा रही है कि किसी भी तरह इस टैंकर को सुरक्षित क्षेत्र में ‘टो’ (Tow) किया जाए ताकि भूमध्य सागर को एक संभावित महाविनाश से बचाया जा सके।

