मिशन इवैक्युएशन : ईरान में बढ़ते तनाव और असुरक्षा के माहौल के बीच वहां फंसे भारतीय छात्रों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। लगभग 100 भारतीय छात्रों का पहला जत्था सुरक्षित वतन वापसी के लिए तैयार है, जो आने वाले 14 और 15 मार्च को भारत पहुंच जाएगा। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) और विदेश मंत्रालय के बीच हुए समन्वय के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छात्रों को सीधे विमान सेवा के बजाय सड़क मार्ग से ईरान की सीमा पार कराकर आर्मेनिया ले जाया जाएगा, जहाँ से वे व्यावसायिक उड़ानों के जरिए दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
इन छात्रों में से अधिकांश उर्मिया और शिराज जैसे शहरों के विश्वविद्यालयों में चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे हैं। योजना के मुताबिक, छात्र सबसे पहले आर्मेनिया के येरेवन पहुंचेंगे और वहां से फ्लाई दुबई जैसी एयरलाइंस के माध्यम से दुबई होते हुए नई दिल्ली पहुंचेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कोई औपचारिक सैन्य निकासी नहीं है, बल्कि छात्रों को सुरक्षित ‘कॉरिडोर’ प्रदान कर व्यावसायिक उड़ानों के माध्यम से वापस लाया जा रहा है। सुरक्षा कारणों से छात्रों को अपनी लाइव लोकेशन साझा न करने और बॉर्डर पर सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ तैयार रहने की हिदायत दी गई है। दिल्ली पहुंचने के बाद छात्रों को उनके गृह राज्यों, विशेषकर कश्मीर तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए बसों का विशेष प्रबंध भी किया गया है।

