दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इस पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद दिल्ली की मतदाता सूची से 47.5 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं।
इस भारी छंटनी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कुल मतदाताओं की संख्या में भारी कमी आई है और यह घटकर अब करीब 97.5 लाख पर आ गई है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, जिन मतदाताओं ने समय पर अपने गणना प्रपत्र (Enumeration Form) जमा नहीं किए या जो अपने पुराने पतों पर नहीं मिले, उनके नाम सूची से हटाए गए हैं।
हटाए गए नामों की इस विशाल संख्या के मुकाबले नए वोटर्स के जुड़ने या छूटे हुए नाम दोबारा दर्ज कराने की रफ्तार बेहद धीमी चल रही है। निर्वाचन आयोग को यह उम्मीद थी कि कम से कम 10 प्रतिशत लोग (यानी लगभग 4.75 लाख नागरिक) अपने नाम दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए आगे आएंगे।
लेकिन इसके विपरीत, प्रक्रिया शुरू होने के शुरुआती 15 दिनों के भीतर नए वोटर बनने और नाम जुड़वाने के लिए सिर्फ 62,583 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं, जो कि प्रशासन के अनुमान से काफी कम हैं। इस सुस्त प्रतिक्रिया ने राजनीतिक दलों और निर्वाचन अधिकारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
विभिन्न जिलों से मिले आंकड़ों के अनुसार, नाम जुड़वाने के लिए आने वाले आवेदनों में भी काफी असमानता देखी गई है। सबसे ज्यादा 7,834 आवेदन पश्चिमी जिले से आए हैं, जबकि इसके बाद उत्तर-पश्चिम (6,384) और पूर्वी दिल्ली (6,297) का स्थान रहा है। इसके विपरीत, नई दिल्ली जिले में सबसे कम मात्र 1,203 आवेदन ही दर्ज किए गए हैं।
सिर्फ नाम हटने की बात नहीं है, बल्कि वर्तमान ड्राफ्ट सूची में शामिल करीब 33 लाख मौजूदा मतदाताओं को भी विभिन्न प्रकार की विसंगतियों और कमियों के कारण नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अधिकारियों द्वारा इन कमियों को दूर करने के लिए लगातार प्रक्रिया जारी है ताकि अंतिम सूची त्रुटिमुक्त तैयार हो सके।
यदि किसी नागरिक का नाम इस नई ड्राफ्ट सूची में नहीं है या उन्हें कोई सुधार कराना है, तो वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इन सभी प्राप्त आवेदनों और आपत्तियों की जांच व निपटारे के बाद, दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को आधिकारिक रूप से प्रकाशित की जाएगी।

