नई दिल्ली/लेह: केंद्र सरकार ने लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) हटा दिया है। गृह मंत्रालय के ताजा आदेश के अनुसार, यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, वांगचुक ने NSA के तहत अपनी हिरासत की निर्धारित अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है, जिसके बाद सरकार ने उन्हें राहत देने का निर्णय लिया है।
सोनम वांगचुक को पिछले साल 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान लेह में हिंसा भड़काई थी। 24 सितंबर को हुई इस हिंसा में 4 लोगों की जान चली गई थी और लगभग 150 लोग घायल हुए थे। इस घटना के दो दिन बाद प्रशासन ने उन पर कड़ा शिकंजा कसते हुए उन्हें जोधपुर जेल भेज दिया था, जहाँ वे पिछले 170 दिनों से बंद हैं।
NSA के कानूनी प्रावधानों की बात करें तो यह कानून सरकार को किसी भी ऐसे व्यक्ति को एहतियातन हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिससे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को बिना औपचारिक अदालती कार्यवाही के अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है। वांगचुक के मामले में प्रशासन ने दलील दी थी कि उनकी गतिविधियों से क्षेत्र की शांति भंग होने की आशंका थी, हालांकि अब केंद्र ने इस कड़े कानून को वापस ले लिया है।
सोनम वांगचुक की रिहाई के आदेश के बाद लद्दाख में उनके समर्थकों के बीच खुशी की लहर है। हालांकि, हिंसा के आरोपों और 4 मौतों के मामले में कानूनी प्रक्रिया क्या मोड़ लेती है, यह देखना अभी बाकी है। फिलहाल, वांगचुक की जेल से रिहाई को लद्दाख के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

