रायपुर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर जोनल कार्यालय ने रायपुर-विशाखापट्टनम नेशनल हाईवे परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। यह जांच छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW/ACB) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी। इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत केस दर्ज किया गया है, जिसके बाद ED ने PMLA 2002 के प्रावधानों के तहत ₹23.35 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया है।
इस घोटाले के मुख्य आरोपी हरमीत सिंह खनुजा और उनके सहयोगियों के खिलाफ विशेष न्यायालय (PC Act), रायपुर में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। जांच में सामने आया है कि 30 जनवरी 2020 को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना जारी होने के बाद, राजस्व रिकॉर्ड में जानबूझकर हेरफेर किया गया। साजिश के तहत जमीनों का फर्जी विभाजन कर मुआवजा राशि को अवैध रूप से बढ़ा दिया गया।

ED के अनुसार, मास्टरमाइंड हरमीत सिंह खनुजा ने अपने सहयोगियों खेमराज कोषले, पुनराम देशलहरे और कुंदन बघेल के साथ मिलकर किसानों का शोषण किया। आरोपियों ने किसानों से शपथ पत्रों और आवेदन पत्रों पर हस्ताक्षर कराए और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से पात्रता से कहीं अधिक मुआवजा राशि स्वीकृत करा ली। इस पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचाया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि कुल ₹27.05 करोड़ की हेराफेरी की गई जिसमें से 23.35 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का पता लगाकर उसे कुर्क किया गया है। आरोपियों ने किसानों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए, जिनमें मुआवजे का पैसा जमा कराया गया। इसके बाद पहले से हस्ताक्षरित चेकों के जरिए बड़ी राशि आरोपियों के निजी खातों में ट्रांसफर कर ली गई, जबकि वास्तविक किसानों को बहुत कम रकम मिली।
फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है और कुर्क की गई संपत्तियों के अलावा अन्य अवैध लेनदेन की कड़ियाँ जोड़ी जा रही हैं। ED की इस कार्रवाई से भू-माफियाओं और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है। आने वाले समय में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां संभव हैं।
