रायपुर। छत्तीसगढ़ में मार्च के महीने से ही सूरज के तेवर तल्ख होने लगे हैं। प्रदेश के कई जिलों में पारा सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस ऊपर जा चुका है, जिससे चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं का अहसास होने लगा है। इस उभरती गर्मी और आने वाले दिनों में लू (हीट वेव) के संभावित खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शासन से स्कूलों के संचालन समय में तत्काल परिवर्तन करने की पुरजोर मांग की है।
बच्चों के स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्राचार के माध्यम से उन्होंने शासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया है कि वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश स्कूल दो पालियों में संचालित हो रहे हैं। दोपहर की पाली में लगने वाले स्कूलों के कारण छोटे बच्चों को छुट्टी के समय भीषण तपिश का सामना करना पड़ता है। दोपहर में स्कूल से घर लौटते वक्त बच्चों में डिहाइड्रेशन, घबराहट और हीट स्ट्रोक (लू लगना) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव विशेष रूप से प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के छात्र-छात्राओं पर पड़ सकता है।
एक पाली में स्कूल चलाने का प्रस्ताव संघ ने शिक्षा विभाग को दिए अपने सुझाव में स्पष्ट किया है कि छात्र हित और स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए राज्य के सभी स्कूलों का संचालन केवल सुबह की एक पाली में ही किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि स्कूलों का समय सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक नियत किया जाए। यह नियम न केवल सरकारी स्कूलों बल्कि प्रदेश के समस्त निजी (अशासकीय) और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए ताकि किसी भी बच्चे की सुरक्षा के साथ समझौता न हो।
शीघ्र निर्णय की उम्मीद प्रांताध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी के साथ ही प्रदेश सचिव बसंत त्रिवेदी, विभिन्न जिला अध्यक्षों और संघ के पदाधिकारियों ने एक सुर में इस मांग का समर्थन किया है। संघ को उम्मीद है कि विभाग स्थिति की गंभीरता को समझेगा और बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार, यदि तापमान में इसी तरह की बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले हफ्तों में मैदानी इलाकों में पारा 40 डिग्री के पार जा सकता है, जिससे स्कूलों के समय में बदलाव अब एक अनिवार्य जरूरत बन गया है।

