दिल्ली | डेस्क : लोकसभा में बुधवार का दिन भारतीय संसदीय इतिहास के सबसे गर्मागर्म दिनों में से एक रहा, जहाँ स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया ‘अविश्वास प्रस्ताव’ पूरी तरह विफल रहा। सदन में लंबी चली बहस और हंगामे के बीच अंततः ध्वनि मत से इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया, जिससे यह साफ हो गया कि ओम बिरला ही सदन की कमान संभालते रहेंगे।
शाह का विपक्ष पर सीधा हमला
प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देने के लिए खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मैदान में उतरे। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि स्पीकर के पद और उनकी निष्ठा पर सवाल उठाना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र के अपमान के समान है। शाह ने जोर देकर कहा कि अध्यक्ष किसी दल का नहीं, बल्कि पूरे सदन का संरक्षक होता है और उन पर इस तरह का अविश्वास जताना विपक्ष की हताशा को दर्शाता है।
सदन में भारी हंगामा और नारेबाजी
गृह मंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष का गुस्सा सातवें आसमान पर था। जैसे ही वोटिंग की प्रक्रिया शुरू करने की बात आई, विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल (सदन के बीचों-बीच) में आ गए। सदन में जमकर नारेबाजी हुई और हंगामे के कारण कार्यवाही को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया। विपक्ष के इस कड़े विरोध के बावजूद, सत्ता पक्ष के भारी संख्या बल और समर्थन के चलते ध्वनि मत से प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया गया।
इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार और विपक्ष के बीच की खाई अब और गहरी हो गई है। अविश्वास प्रस्ताव के गिरने के बाद सत्ता पक्ष ने इसे अपनी नैतिक और लोकतांत्रिक जीत बताया है, जबकि विपक्ष ने सदन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना जारी रखा है।

