छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें संपत्ति में बराबर का अधिकार देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त तथा पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल के बाद, महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर पंजीयन शुल्क में भारी छूट दी जा रही है। इस निर्णय से राज्य भर की महिलाओं में संपत्ति खरीदने को लेकर नया उत्साह देखा जा रहा है।
राज्य सरकार के नए नियमों के तहत, महिलाओं के नाम पर जमीन या अन्य अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क को आधा कर दिया गया है। पहले जहां संपत्ति के बाजार मूल्य पर 4 प्रतिशत की दर से पंजीयन शुल्क लिया जाता था, वहीं अब इसे घटाकर मात्र 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इस सीधे लाभ से महिलाओं के लिए अपने नाम पर संपत्ति खरीदना काफी सुलभ और किफायती हो गया है।
इस जनहितकारी योजना का लाभ उठाने वाली रायगढ़ की श्रीमती शर्मिला मिश्रा ने हाल ही में अपने नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराई है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने के कारण उन्हें इस प्रक्रिया में करीब 25 हजार रुपये की सीधी बचत हुई है। उन्होंने इस वित्तीय राहत पर खुशी जताते हुए कहा कि सरकार का यह कदम महिलाओं के जीवन में बड़ा आर्थिक बदलाव ला रहा है।
श्रीमती मिश्रा ने आगे बताया कि रजिस्ट्री के खर्च में कमी आने से मध्यम वर्गीय परिवारों की महिलाओं के लिए संपत्ति के दस्तावेज अपने नाम कराना आसान हो गया है। जब कोई महिला संपत्ति की मालिक बनती है, तो इससे न केवल उसका व्यक्तिगत आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि समाज में उसकी स्थिति भी सुदृढ़ होती है। यह पहल उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक मजबूत माध्यम बन रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की नीतियां महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता की नींव को मजबूत करती हैं। जब परिवार की महिलाएं संपत्ति में हिस्सेदार बनती हैं, तो इससे पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति में स्थिरता आती है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल महिलाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

