रायपुर, 13 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) में आज से दो दिवसीय ‘द्वितीय छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट’ का भव्य शुभारंभ हुआ। विबग्योर एन.ई. फाउंडेशन और छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम “सस्टेनेबल सिनर्जी: ट्रेडिशनली फ्यूचरिस्टिक” रखी गई है। इस आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य राज्य की समृद्ध जनजातीय विरासत और आधुनिक पर्यावरणीय समाधानों के बीच एक मजबूत सेतु स्थापित करना है, ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।
समिट के पहले दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों और चर्चाओं का आयोजन किया गया, जिसमें ‘जनजातीय बुद्धिमत्ता’ (Tribal Wisdom) पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे आदिवासियों का सदियों पुराना पारंपरिक ज्ञान आज के जलवायु संकट से निपटने में सहायक हो सकता है। इसके साथ ही, राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को देखते हुए ‘जिम्मेदार खनन’ (Responsible Mining) और ‘कार्बन उत्सर्जन में कमी’ (Decarbonization) जैसे गंभीर विषयों पर भी नीति निर्माताओं और उद्योगपतियों ने अपने विचार साझा किए, ताकि छत्तीसगढ़ को ‘नेट जीरो’ लक्ष्यों की ओर ले जाया जा सके।
पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए समिट में ‘ग्रीन एंटरप्रेन्योरशिप’ पर एक विशेष ट्रैक रखा गया है। इसमें छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में पाए जाने वाले औषधीय पौधों, ईको-टूरिज्म और कचरा प्रबंधन (Circular Economy) के क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने की रणनीतियां बनाई जा रही हैं। आयोजन स्थल पर एक ‘ग्रीन एक्सपो’ भी लगाया गया है, जहाँ टिकाऊ जीवनशैली से जुड़े स्वदेशी उत्पादों और नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है, जो स्थानीय उद्यमियों के लिए एक बड़ा मंच साबित हो रहा है।
सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी यह समिट अत्यंत समृद्ध है। परिसर में ‘आर्ट इन एक्शन’ के तहत एक लाइव आर्ट कैंप का आयोजन किया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध ‘राजवार भित्ति चित्रकला’ (Jhinjhri) के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। इसके अलावा, ‘नेचर इन मोशन’ नाम से एक आर्ट वॉक का आयोजन किया गया है, जहाँ प्रकृति से प्रेरित कलाकृतियाँ दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। शाम के सत्रों में राज्य की पारंपरिक लोक कलाओं और जनजातीय संगीत की प्रस्तुतियों ने इस बौद्धिक विमर्श में सांस्कृतिक रंग भर दिए।
यह समिट न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है, जहाँ विकास की दौड़ में पर्यावरण को पीछे नहीं छोड़ा जा रहा है। आईआईटी भिलाई और एनआईटी रायपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की भागीदारी ने इस आयोजन को एक अकादमिक मजबूती प्रदान की है। कल, यानी 14 मार्च को, समिट के समापन सत्र में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा और भविष्य के लिए एक ‘ग्रीन रोडमैप’ तैयार किया जाएगा।

