दंतेवाड़ा: सार्वजनिक क्षेत्र के लौह अयस्क दिग्गज, एनएमडीसी (NMDC) की किरंदुल परियोजना ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष में 50 मिलियन टन (50 MT) लौह अयस्क उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। छत्तीसगढ़ के बैलाडीला पहाड़ियों में स्थित इस इकाई की यह सफलता भारतीय खनन इतिहास के सबसे बड़े मील के पत्थरों में से एक मानी जा रही है, जिसने एनएमडीसी को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत पहचान दिलाई है।
इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय वहां कार्यरत ‘कर्मवीरों’ को दिया जा रहा है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद, श्रमिकों, इंजीनियरों और प्रबंधन के सामूहिक प्रयासों ने इस असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव कर दिखाया है। उत्पादन में इस भारी उछाल के लिए आधुनिक मशीनीकरण, उन्नत तकनीक के उपयोग और खदान सुरक्षा मानकों के साथ बिना किसी समझौते के काम करने की रणनीति को मुख्य कारण माना जा रहा है।
आर्थिक दृष्टि से यह रिकॉर्ड उत्पादन भारत के इस्पात (Steel) उद्योग के लिए संजीवनी के समान है। किरंदुल से निकलने वाला उच्च गुणवत्ता वाला लौह अयस्क देश के बड़े स्टील प्लांटों की प्राथमिक जरूरत है। 50 मिलियन टन के इस आंकड़े से न केवल घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी गति मिलेगी। इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए प्रबंधन ने इसे राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया है।
यह गौरवपूर्ण उपलब्धि न केवल एनएमडीसी के लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए गर्व का विषय है। इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसरों और बुनियादी ढांचे के विकास को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

