रायपुर: छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम ने अप्रत्याशित करवट ली है, जिससे चिलचिलाती गर्मी झेल रहे लोगों को बड़ी राहत मिली है। प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश हुई और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। मौसम विभाग के अनुसार, यह बदलाव उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी तेलंगाना के ऊपर बने दो अलग-अलग चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulations) के कारण आया है। इस सिस्टम के प्रभाव से राज्य के वातावरण में नमी आई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई।
राजधानी रायपुर में मौसम का असर सबसे अधिक देखा गया, जहाँ सुबह 8:30 बजे तक रिकॉर्ड 26 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बारिश और घने बादलों की वजह से रायपुर का अधिकतम तापमान सामान्य से 4 डिग्री गिरकर 37.1 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.7 डिग्री कम (22.2 डिग्री) रहा। शहर के लाभांडीह और माना इलाकों में भी अच्छी बारिश हुई, जिससे सुबह के वक्त मौसम काफी सुहावना बना रहा। हालांकि, इस बेमौसम बारिश ने उमस की स्थिति भी पैदा की है।
प्रदेश के अन्य जिलों की बात करें तो कुटरू में सबसे ज्यादा 5 सेमी बारिश दर्ज की गई, जबकि भटगांव, सरिया और बिलाईगढ़ जैसे क्षेत्रों में 2-2 सेमी वर्षा हुई। बिलासपुर, सारंगढ़ और लोरमी जैसे इलाकों में भी हल्की बूंदाबांदी ने मौसम को ठंडा कर दिया। तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो राजनांदगांव 41 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, वहीं अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 18.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो राज्य में सबसे कम था।
मौसम वैज्ञानिकों ने अगले 24 घंटों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। विभाग के मुताबिक, प्रदेश के एक-दो स्थानों पर अभी भी गरज-चमक के साथ वज्रपात (आकाशीय बिजली) होने की संभावना बनी हुई है। अंधड़ की चेतावनी देते हुए कहा गया है कि कुछ इलाकों में धूल भरी तेज हवाएं चल सकती हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि मेघगर्जन और बारिश की इन गतिविधियों में आज शाम से कमी आने की उम्मीद है, जिससे आसमान धीरे-धीरे साफ होने लगेगा।
7 मई के लिए रायपुर के विशेष पूर्वानुमान में बताया गया है कि शहर में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि तापमान में अचानक आए बदलाव से मौसमी बीमारियों और सर्दी-खांसी का खतरा बढ़ जाता है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को ठंडी हवाओं से बचने का सुझाव दिया गया है।
आने वाले दिनों की चुनौतियों को लेकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह राहत अधिक समय तक नहीं टिकेगी। जैसे ही चक्रवाती सिस्टम का प्रभाव कम होगा, सूरज के तेवर फिर से कड़े हो जाएंगे। अगले तीन दिनों के भीतर प्रदेश के अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि होने का अनुमान है। इसका सीधा मतलब यह है कि नौतपा से पहले ही प्रदेशवासियों को एक बार फिर भीषण गर्मी और लू (Heatwave) का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
अंततः, मौसम विभाग ने किसानों को भी सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों और अनाज को सुरक्षित स्थानों पर रखें, ताकि अचानक होने वाली बारिश और तेज हवाओं से नुकसान न हो। बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लेने और सुरक्षित इमारतों में रहने की हिदायत भी दी गई है। छत्तीसगढ़ में मानसून के आगमन से पहले प्री-मानसून की यह सक्रियता हर साल देखने को मिलती है, लेकिन इस बार हवाओं की गति ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है।

