अमेरिका-इजरायल में बढ़ी तल्खी: क्या ट्रंप ढूंढ रहे हैं युद्ध से निकलने का रास्ता?
वाशिंगटन/तेल अवीव: मध्य पूर्व में जारी ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दो सप्ताह बाद अब अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने फरवरी के अंत में ईरान पर चौतरफा हमले का आदेश दिया था, अब इस युद्ध को लंबा खींचने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब इस संघर्ष से पीछे हटने या इसे ‘सीमित’ करने के बहाने तलाश रहा है, जबकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के शासन को पूरी तरह उखाड़ फेंकने के अपने लक्ष्य पर अड़े हुए हैं।
गठबंधन में दरार और अलग-अलग लक्ष्य शुरुआत में दोनों देश ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को नष्ट करने के लिए एक साथ आए थे, लेकिन अब ट्रंप का ध्यान युद्ध के आर्थिक बोझ और वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ रहा है। ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया कि वे ईरान के साथ एक ‘बेहतर डील’ के लिए तैयार हैं, जिसे वे अपनी जीत के रूप में पेश कर सकें। दूसरी ओर, इजरायल इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई मान रहा है और वह तब तक रुकने को तैयार नहीं है जब तक ईरान की सैन्य क्षमता शून्य न हो जाए।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने और तेल टैंकरों पर हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। ट्रंप अब चाहते हैं कि अन्य देश और सहयोगी देश इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी साझा करें। ट्रंप का यह ‘टीम वर्क’ का आह्वान विशेषज्ञों द्वारा युद्ध से धीरे-धीरे हाथ खींचने और जिम्मेदारी दूसरों पर डालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वे अब खुले तौर पर कह रहे हैं कि अमेरिका अकेले इस क्षेत्र की रखवाली का बोझ नहीं उठाएगा।
ईरान का पलटवार और नया मोड़ ईरान ने इस युद्ध में नया मोड़ लाते हुए न केवल इजरायल बल्कि क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु (खबरों के अनुसार) के बाद भी ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का प्रतिरोध कम नहीं हुआ है। ईरान ने अब ‘असममित युद्ध’ (Asymmetric warfare) की नीति अपनाई है, जिससे अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हो रहा है। बढ़ते अमेरिकी हताहतों की संख्या ने ट्रंप पर घरेलू दबाव भी बढ़ा दिया है।
घरेलू राजनीति और ‘फॉरएवर वॉर’ का डर अमेरिका में विपक्षी दल और जनता अब इस युद्ध को एक और ‘अंतहीन युद्ध’ (Forever War) के रूप में देखने लगी है। ट्रंप, जिन्होंने अपने चुनाव प्रचार में युद्धों को खत्म करने का वादा किया था, अब अपनी छवि को लेकर चिंतित हैं। वे नहीं चाहते कि 2026 के मध्यावधि चुनाव या भविष्य की राजनीति पर इस युद्ध का नकारात्मक असर पड़े। यही कारण है कि वे अब ईरान को ‘पूरी तरह परास्त’ बताने के साथ-साथ समझौते की मेज पर लाने की बात कर रहे हैं।

