भारत में चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में रोबोटिक सर्जरी ने एक नया मुकाम हासिल किया है। देश में इस आधुनिक तकनीक का दायरा बेहद तेजी से फैल रहा है, जिसके चलते पिछले एक साल के भीतर ही रोबोटिक सर्जरी का आंकड़ा 30 हजार से बढ़कर 50 हजार के पार पहुंच गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही, तो अगले साल तक यह आंकड़ा एक लाख के पार पहुंच सकता है।
इस तीव्र गति से बढ़ते विस्तार के पीछे भारत में मेडिकल टूरिज्म को मिल रही जबरदस्त उड़ान है। पश्चिमी देशों यानी अमेरिका और यूरोप की तुलना में भारत में अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी का खर्च काफी कम है। किफायती कीमत और उच्च स्तरीय चिकित्सीय सुविधाओं के कारण अब दुनिया भर के मरीजों का रुझान तेजी से भारत की तरफ बढ़ रहा है।
विदेशी मरीजों की बात करें तो, मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) के अलावा पूर्व सोवियत संघ से जुड़े देश जैसे उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, आर्मेनिया और अजरबैजान आदि से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भारत आ रहे हैं। इसके अलावा, पश्चिमी देशों के मरीज भी यहां कम खर्च में बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने पहुंच रहे हैं।
रोबोटिक तकनीक के आने से जटिल से जटिल बीमारियों का इलाज बेहद सटीक तरीके से संभव हो पा रहा है। कैंसर, यूरोलॉजी (विशेषकर प्रोस्टेट), स्पाइन (रीढ़ की हड्डी), मस्तिष्क, हृदय और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से जुड़ी जटिल सर्जरी अब अधिक सुरक्षित रूप से की जा रही हैं।
इस तकनीक के इस्तेमाल से मरीजों को कई शारीरिक लाभ भी मिल रहे हैं। पारंपरिक सर्जरी की तुलना में इसमें बहुत छोटे चीरे लगते हैं, ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव (ब्लड लॉस) बेहद कम होता है और मरीज की रिकवरी बहुत तेजी से होती है, जिससे अस्पताल में रहने के दिन भी घट जाते हैं।
हालांकि, इस क्षेत्र के सामने प्रशिक्षित सर्जनों की संख्या बढ़ाना एक बड़ी चुनौती भी है। देश में सामान्य सर्जनों की संख्या तो बड़ी है, लेकिन रोबोटिक सर्जरी में पूरी तरह दक्ष और प्रमाणित सर्जनों का दायरा अभी सीमित है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक बड़े वैश्विक सम्मेलन में रोबोटिक सर्जरी के विशेष प्रमाणित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी लॉन्च किए गए हैं।
इन सभी पहलों और आधुनिक चिकित्सा के दम पर भारत धीरे-धीरे रोबोटिक सर्जरी और मेडिकल टूरिज्म के ग्लोबल हब के रूप में अपनी स्थिति को बेहद मजबूत कर रहा है। आने वाले समय में यह तकनीक देश के स्वास्थ्य ढांचे को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

