Bidyut Innovation के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल शाह ने भारतीय रोबोटिक्स क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। उनके विजन के अनुसार, भारत अब दुनिया के सबसे किफायती और एडवांस ह्यूमनॉइड रोबोट्स विकसित करने की तैयारी कर रहा है। देश अगले 3 से 5 साल के भीतर अपने खुद के ‘मेड-इन-इंडिया’ रोबोट्स बाजार में उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद महंगे रोबोट्स को कड़ी चुनौती देंगे।
इन रोबोट्स की सबसे बड़ी खासियत इनकी लागत होगी। जिस तरह भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान में कम खर्च में बड़ी सफलताएं हासिल की हैं, उसी तर्ज पर इन घरेलू रोबोट्स को विदेशी विकल्पों की तुलना में मात्र एक-चौथाई (25%) कीमत पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम न केवल तकनीक को सुलभ बनाएगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की एक नई पहचान भी स्थापित करेगा।
हाल ही में प्रदर्शित किए गए G-1 नामक रोबोट्स ने अपनी क्षमताओं से सभी को हैरान कर दिया। हालांकि इनका बाहरी ढांचा अंतरराष्ट्रीय सहयोग (चीन) से तैयार है, लेकिन इनकी पूरी कोडिंग और प्रोग्रामिंग भारत में ही की गई है। मंच पर इन मशीनों ने न केवल शानदार डांस पेश किया, बल्कि कुंग-फू जैसी जटिल शारीरिक मुद्राएं भी दिखाईं। दिलचस्प बात यह है कि एक रोबोट को सिर्फ डांस सिखाने के लिए विशेषज्ञों को करीब 10 दिनों तक गहन कोडिंग करनी पड़ी।
तकनीकी प्रदर्शन के दौरान इन रोबोट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ की झलक भी देखने को मिली। जब एक रोबोट से इंसानों के प्रति उसकी पसंद पूछी गई, तो उसने मजाकिया लहजे में कहा कि उसे ‘हां’ कहने के लिए प्रोग्राम तो किया गया है, लेकिन लोगों के ‘WhatsApp फॉरवर्ड्स’ देखने के बाद उन्हें पसंद करना थोड़ा मुश्किल काम लगता है। इस तरह के संवाद दिखाते हैं कि भारतीय प्रोग्रामिंग अब कितनी परिष्कृत और इंटरैक्टिव हो चुकी है।
इस पूरी परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य इन मशीनों को सीधे बाजार में बेचना नहीं, बल्कि देश के शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाना है। विजन यह है कि भारतीय छात्र इन एडवांस रोबोट्स को करीब से देखें, उनसे प्रेरित हों और भविष्य में अपनी खुद की स्वदेशी तकनीक विकसित करें। यह पहल भारत को रोबोटिक्स के क्षेत्र में केवल एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक सक्षम निर्माता बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

