मूल रूप से महाराष्ट्र के कोल्हापुर का रहने वाला श्रेयश, संस्थान में एक होनहार छात्र माना जाता था। सोमवार सुबह करीब 6 बजे जब हॉस्टल परिसर में उसका खून से लथपथ शव मिला, तो वहां मौजूद छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हड़कंप मच गया। तत्काल इसकी सूचना कॉलेज प्रशासन और स्थानीय बुटीबोरी पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
घटना के पीछे का प्राथमिक कारण परीक्षा का अत्यधिक तनाव और मानसिक दबाव माना जा रहा है। श्रेयश के दोस्तों और सहपाठियों के अनुसार, वह पिछले कुछ दिनों से काफी परेशान दिख रहा था। वह न तो नियमित रूप से क्लास जा रहा था और न ही अपने दोस्तों से घुल-मिल रहा था। सेमेस्टर परीक्षाओं के करीब आने के साथ ही उसकी चिंता बढ़ती जा रही थी, जिसका परिणाम इस आत्मघाती कदम के रूप में सामने आया।
इस घटना के बाद पुलिस जांच में कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। पुलिस इस बात की तहकीकात कर रही है कि श्रेयश, जो स्वयं चौथी मंजिल के कमरे में रहता था, वह तड़के सुबह नौवीं मंजिल पर कैसे और किन परिस्थितियों में पहुँचा। फिलहाल पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिसके कारण मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए उसके मोबाइल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है।
छात्र की मौत की खबर फैलते ही IIIT कैंपस में आक्रोश का माहौल पैदा हो गया। बड़ी संख्या में छात्रों ने संस्थान के भीतर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को लेकर सुविधाएं न के बराबर हैं। उनका कहना है कि जब कोई छात्र शैक्षणिक दबाव के कारण मानसिक रूप से टूट रहा होता है, तो उसे उचित काउंसलिंग या भावनात्मक सहयोग प्रदान करने के लिए संस्थान के पास कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि कैंपस में प्रोफेशनल मनोवैज्ञानिकों और काउंसलिंग सेवाओं को अनिवार्य रूप से बहाल किया जाए। छात्रों का तर्क है कि कड़े शैक्षणिक पाठ्यक्रम और प्रतिस्पर्धा के युग में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी करना घातक साबित हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक सहायक और संवेदनशील वातावरण बनाने की अपील की है।
वहीं, श्रेयश के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई थी और वे सोमवार शाम तक नागपुर पहुंच गए थे। अपने युवा बेटे को खोने के गम में परिवार का बुरा हाल है। बुटीबोरी पुलिस ने फिलहाल आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है और कॉलेज प्रशासन से भी छात्र की शैक्षणिक गतिविधियों और व्यवहार के बारे में जानकारी मांगी है।
यह हृदयविदारक घटना एक बार फिर हमारे समाज और शिक्षण संस्थानों को इस बात पर सोचने को मजबूर करती है कि क्या हम छात्रों पर उनकी क्षमता से अधिक बोझ डाल रहे हैं। यह समय है कि शैक्षणिक संस्थानों में केवल ‘ग्रेड्स’ पर ध्यान देने के बजाय छात्रों की मानसिक स्थिति और उनके जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

