रायपुर में भगवान गणेश की प्रतिमाओं के मूल स्वरूप और पारंपरिक बनावट से छेड़छाड़ का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आधुनिकता या कलात्मकता के नाम पर गणेश मूर्तियों के साथ किए जा रहे बदलावों को लेकर राजधानी के संत समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों में गहरा आक्रोश है। संत समाज के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी राजेश्वरानंद और छत्तीसगढ़ बजरंग दल के संयोजक भूषण साहू ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
संत समाज का प्रमुख आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में गणेश प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन धरातल पर उनका पालन नहीं हो रहा है। प्रशासन की ओर से निगरानी के लिए कोई सक्रिय अमला मूर्ति निर्माण स्थलों और पंडालों तक नहीं पहुंच रहा है, जिससे मूर्तिकारों द्वारा नियमों की अनदेखी बेधड़क जारी है।
इस गंभीर स्थिति का जायजा लेने के लिए साधु-संत लगातार शहर के विभिन्न मूर्तिकारों के पंडालों और निर्माण स्थलों का दौरा कर रहे हैं। वे मौके पर जाकर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और यह सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं कि सनातन परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध जाकर कोई भी विकृत रूप न गढ़ा जाए।
संतों और हिंदू संगठनों ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने अपनी सुस्ती नहीं छोड़ी, तो संत समाज सड़क पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेगा।
धार्मिक आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर संत समाज ने प्रशासन से पूरी गंभीरता दिखाने की अपील की है। उनका कहना है कि गणेशोत्सव जैसे बड़े पर्व से पहले मूर्तिकारों को जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की सामाजिक या धार्मिक भावना आहत होने से बचाई जा सके।

